भागलपुर के लड़के का कमाल: 5 साल में 20 हजार से 10 लाख पहुंचा कारोबार, ऐसे बना आत्मनिर्भर

पटना

बिहार के भागलपुर से सैयद अरशद नाता रखते हैं। इनके पिता राज्य सरकार में कोऑपरेटिव इंस्पेक्शन ऑफिसर के तौर पर सेवा दे रहे थे। इनके घर में कोई भी ऐसा नहीं था, जिसने कभी बिजनेस किया हो। यहां तक कि अरशद ने भी बिजनेस के बारे में कभी भी नहीं सोचा था  हालांकि, उनके भाग्य ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था। वर्ष 2002 में ये दिल्ली चले गए थे। यहां जामिया सीनियर सेकेंडरी स्कूल से उन्होंने अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स में उन्होंने एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उनके मुताबिक उस वक्त एविएशन इंडस्ट्री में नौकरी पाना बहुत ही मुश्किल था। ऐसे में उन्होंने कलेक्शन एक्सपर्ट के तौर पर काम करना शुरू कर दिया।

लिखा एक रोमांटिक फिक्शन

Syed Arshad" Has Made a Special Identity In The World Of Books... - Zindagi  Se Baat

कुछ वर्षों तक वहां काम करने के बाद उनकी जिंदगी में कुछ ऐसा हुआ, जिसकी वजह से उनकी जिंदगी बदल गई। हमेशा से लिखने की वे चाहत रखते थे। उन्होंने एक रोमांटिक फिक्शन लिखा, जिसका शीर्षक था इफ इट्स नॉट लव। एक पब्लिशर ढूंढने के लिए तब उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा था। ऐसे में उन्होंने कोलकाता में खुद एक एजेंसी के जरिए इसे प्रकाशित करवाने की सोच ली।

फिर शुरू किया बिजनेस

How Bihar's Syed Arshad became owner of BlueRose Publishers | ABP Special

बाकी लोग बाद में उनसे पूछने लगे कि उन्होंने कैसे इसे खुद से प्रकाशित करवाया। उन्होंने लोगों को सलाह देनी शुरू कर दी। फिर उन्हें एहसास हुआ कि इस बिजनेस के लिए बहुत बड़ा बाजार मौजूद है। अरशद ने 5 लाख रुपये लगाए और वर्ष 2015 में ब्लू रोज पब्लिशर्स के नाम से दिल्ली में अपनी कंपनी को रजिस्टर कर लिया। शुरूआत इन्होंने केवल 2 लोगों को लेकर की।

करोड़ों में पहुंचा रेवेन्यू

पहले साल केवल 20 हजार रुपए का रेवेन्यू आया। इसके बाद अगले साल यह 10 लाख तक पहुंच गया। वर्ष 2017 में कंपनी का रेवेन्यू एक करोड़ रुपये का रहा। वहीं, वर्ष 2018 में इसने तीन करोड़ को छू लिया। कंपनी की रेवेन्यू बढ़ती चली गई। आज इस कंपनी में 50 से भी अधिक लोग काम कर रहे हैं। अरशद की सफलता से आज हर कोई प्रेरणा ले रहा है।

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