30 बैग मशरूम 500 बैग तक पहुंचा, रोहतास की संगीता घर बैठे यूं कमा रहीं 25-30 हजार

पटना

एक वक्त था जब बिहार के रोहतास की संगीता के परिवार की आमदनी का एक मात्र जरिया रेडिमेड की दुकान टूट गई। पैसों की तंगी से जूझना पड़ा। बच्चे पढ़-लिख रहे थे। हालात ऐसे आ गए कि बेटी को इंजीनियरिंग कराने के लिए गहने तक बेचने पड़े। ऐसे में 2012 में अखबार पढ़ते हुए संगीता को मशरूम उत्पादन के प्रशिक्षण की जानकारी का पता चला। घर संवारने के लिए कुछ करना जरूरी था। संगीता ने सोचा कि क्यों न इसी दिशा में कदम उठाया जाए। सकारात्मक सोच और कुछ करने की तमन्ना ने उन्हें कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचा दिया। इसके बाद तो संगीता ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

आज 25-30 हजार महीने की आमदनी

संगीता बचाती हैं कि मशरूम की खेती का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने शुरुआत में सिर्फ 30 बैग मशरूम लगाए। लाभ अच्छा हुआ तो धीरे-धीरे ये संख्या बढ़ने लगी। आज संगीता 500 बैग से अधिक मशरूम लगाती हैं और इससे उन्हें महीने की 25 से 30 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। कृषि विज्ञान केंद्र की मदद से संगीता आज मशरूम के अलावा लड्डू, आचार, पापड़ इत्यादि भी बना रही हैं।

2 दर्जन से अधिक महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

संगीता न केवल खुद आगे बढ़ीं बल्कि अपने साथ की महिलाओं को भी आगे बढ़ाया। संगीता ने गांव की महिलाओं संग मिल एक समूह बनाया है। इसमें 20 से अधिक महिलाएं शामिल हैं। ये महिला समूह आचार, मुरब्बा, मिठाई इत्यादि बना बिक्री करता है। अब इस समूह में शामिल हर महिला महीने में 12 से लेकर 18 हजार रुपये तक की आमदनी कर आत्मनिर्भर बनने की राह पर है।

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