विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू। फाइल फोटो। Image Source : Agencies

80% भाजपा मंत्रियों ने खूब पैसे ले तबादले किये, जदयू के अभियंत्रण मंत्री ने घूस से घर भरा : ज्ञानू

Patna : कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू ने आज फिर से बड़ा धमाका कर दिया। उन्होंने कहा कि स्थापना में भारतीय जनता पार्टी के अस्सी फीसदी मंत्रियों ने खूब डट कर पैसा लिया है। अफसरों और इंजीनियरों को चज करके, दलालों से फोन करवा कर पैसा लिया है। जिनका तबादला नहीं होना था उनको भी बुला-बुला कर वसूला गया है। ज्ञानू ने भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी का नाम तो नहीं लिया लेकिन सीधे तौर पर अशोक चौधरी पर ही इशारा करते हुये कहा कि सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर, चीफ इंजीनियर और कार्यपालक अभियंताओं से पैसे वसूल-वसूल कर अपना घर भर लिया है। करोड़ों की वसूली हुई है। किसी को बिना पैसे लिये कुछ भी नहीं दिया है। पूरा विभाग पैसा लेकर हिला दिया।

 


भाजपा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू ने इशारा करते हुये कहा कि जदयू के अधिकांश मंत्रियों ने ट्रांसफर पोस्टिंग में पैसे नहीं लिये लेकिन वैसे लोग जो दूसरी पार्टियों से आये हैं, अभियंत्रण विभाग, कार्य विभाग के मालिक हैं, उन्होंने तो इंजीनियरों से बुला बुला कर पैसा वसूल किया है। खूब डट कर पैसा लिया है। सहायक अभियंता से लेकर अधीक्षण अभियंता तक से पैसे की वसूली की है। जिन इंजीनियरों से पैसा नहीं मिला है उनको दूर दराज के क्षेत्रों में फेंक दिया गया। नियम कायदे सब दरकिनार कर दिये गये हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा मंत्रियों में तो किसी बात का डर ही नहीं था। अस्सी फीसदी मंत्रियों ने तिजोरियां भर ली। अफसरों को चेज करके पैसा वसूला। खबर करवाया गया। भाजपा के मंत्रियों को तो भ्रष्टाचार मं बदनामी का भी कोई डर नहीं रह गया है। बता दें कि आज ही जदयू के एक मंत्री मदन सहनी ने इसलिये इस्तीफा दे दिया कि उनके विभागीय मंत्री अतुल कुमार ने तबादले की फाइल आगे ही नहीं बढ़ने दिया। सामाजिक न्याय मंत्री मदन साहनी विभागीय स्थापना में अपनी नहीं सुने की वजह से परेशान हैं।
साहनी ने राज्य की नौकरशाही पर सवाल उठाये। बिहार विधानसभा में बहादुरपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले साहनी ने कहा कि मुझे सरकारी घर और कार नहीं चाहिये, जब विभाग में कोई मेरी सुनता ही नहीं है तो हम बने रहकर क्या करेंगे। अभी विभागीय स्थापना होना है, तीन दिन से स्थापना की फाइल लेकर प्रधान सचिव अतुल कुमार बैठा है। आखिर इतनी हिम्मत उसे मिल कहां से रही है कि वो मुझे मेरे विभाग में काम नहीं करने दे रहा है।
बिहार में यह स्थापना का महीना होता है। जून और दिसंबर में सरकारी कर्मचारियों, अफसरों का विभागीय स्तर पर तबादला होता है। स्थापना समिति सभी विभागों में विभागीय मंत्री की अध्यक्षता में होती है। अमूमन 30 जून और 31 दिसंबर को ताबड़तोड़ ट्रांसफर-पोस्टिंग होती है। बीते 24 घंटे में अलग-अलग विभागों से 1804 ट्रांसफर-पोस्टिंग हो चुकी है। अभी सैकड़ों अधिसूचना बाकी है।

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