एक एकड़ से 9 लाख की कमाई, बिहारी युवक ने मछली जीरा से खोल ली अपनी किस्मत

पटना
हम यह नहीं कह रहे कि कोई भी काम आसान होता है और सफलता चुटकी बजाते मिल जाती है। हां ये बात जरूर है कि अगर किसी काम को लगन से किया जाए तो कठिन से कठिन काम भी पूरा होता है और आपको सफलता जरूर मिलती है। कुछ ऐसी ही नजीर पेश करते हैं बिहार के अरवल जिले के प्रणव सिंह। बिहार का ये युवा आज अपनी मेहनत की बदौलत आत्मनिर्भर है। लॉकडाउन के दौरान जब सब जूझ रहे थे तो इस युवा ने उस समय का इस्तेमाल कुछ ऐसे किया जिसका फायदा आज मिल रहा है।

4 कट्ठे से शुरू किया मछली पालन, आज आठ एकड़ तक फैला कारोबार

प्रणव सिंह अरवल के रहने वाले हैं। उन्होंने 4 कट्ठे से मछली पालन का व्यवसाय शुरू किया था। लेकिन कड़ी मेहनत की बदौलत आज वो 8 एकड़ में फिश फार्मिंग करते हैं और इस बिजनेस में उनके पार्टनर भी हैं। प्रणव ने मछली पालन की परंपरागत तकनीक से हटकर वैज्ञानिक तरीके के सहारा लिया। इसका नतीजा ये रहा कि एक तालाब से उन्हें डबल मुनाफा होने लगा।

ईंट भट्ठे से खराब हुई जमीन का इस्तेमाल

प्रणव बताते हैं कि उन्होंने तालाब जहां बनाया वहां पहले ईंट भट्ठा चलता था। मिट्टी खत्म होने के बाद भट्ठा वाले छोड़कर चले गए। जमीन बंजर थी। प्रणव बताते हैं कि इसी जमीन का इस्तेमाल तालाब बनाने के लिए किया गया। सरकारी स्कीम के तहत तालाब की खुदाई हुई। तकरीबन ढाई से तीन लाख रुपये लगे।

चार तरह की मछली एक तालाब में

सामान्य रूप से कारोबारी एक तालाब में तीन तरह की मछली रखते हैं, लेकिन प्रणव ने रिसर्च के बाद चार तरह की मछली रखीं। एक आईएमसी यानी रोहू, कतला और कॉमन क्रॉप, दूसरी मांगुर के साथ पंगासिया मछली। मार्च में ये प्रक्रिया शुरू हुई और लॉकडाउन लग गया। प्रणव बताते हैं कि अप्रैल में तालाब में मछली का बच्चा डाला गया। लॉकडाउन के दौरान ही मछलियां बड़ी होकर मुनाफा देने वाली हो गईं। प्रणव के मुताबिक एक एकड़ तालाब से करीब 9 लाख रुपये तक का मुनाफा किया जा सकता है। प्रणव अब बिहारी मछली पालकों को फिश सीड भी उपलब्ध कराते हैं। इस तरह उनका स्टार्टअप घर बैठे मुनाफा कमाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *