अजब कहानी, 90 फीसदी हड्डियों ने छोड़ा साथ, फिर भी बुलंद हौसले से लैस है बिहार की बेटी

बिहार के भागलपुर की रहने वाली सबल परवीन की कहानी ऐसी है कि इसे जानने के बाद आप भी चौंक जाएंगे। फिर भी यह कहानी आपको प्रेरणा देगी। सबल परवीन की उम्र 21 साल की है। ये एक ऐसी बीमारी से ग्रसित हैं, जिसमें हड्डियां एकदम कमजोर हो जाती हैं और इसकी वजह से टूटने लगती हैं। ये एक जेनेटिक डिसऑर्डर है जो कि ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफेक्ता के नाम से जाना जाता है। इनके शरीर की 90 प्रतिशत से भी ज्यादा हड्डियां टूटी हुई हैं। इस वजह से ये अपना कोई भी काम खुद से कर पाने में खुद को लाचार महसूस करती हैं। यहां तक कि इनका हिलना-डुलना भी संभव नहीं है।

मजबूत हैं इरादे

फिर भी इनके इरादे बहुत ही मजबूत हैं। अपने आपको इन्होंने कभी निःशक्त माना ही नहीं है। परवीन बताती हैं कि तरस भरी निगाहों से लोग उन्हें देखते हैं। उनकी पैदाइश तो एक सामान्य बच्चे की तरह ही हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे उनके शरीर में बदलाव आने शुरू हो गए थे।

बहनें रखती हैं ख्याल

परवीन की मां गजाला के मुताबिक पैदा होने के समय से ही इनकी त्वचा बहुत ही पतली थी। हड्डियां इनकी बेहद कमजोर हैं। बहुत से डॉक्टर को दिखाया, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। सुबह जगने से लेकर रात में सोने तक परवीन की बहनें उनका ख्याल रखती हैं। परवीन के माता-पिता भी उनका पूरा साथ दे रहे हैं।

पिता बढ़ाते हैं हौंसला

परवीन को कई बार लगता है कि उनका शरीर किसी पिंजरे की तरह है। ऐसे में उनके पिता उनका हौसला बढ़ाते हैं। उनके पिता मोहम्मद शाहिद अनवर उन्हें एक गाना सुनाते हैं, जिसके बोल कुछ इस तरह से हैं कि सबसे बड़ी सौगात है जीवन, नादान हैं तो जीवन से हारे।

फिर भी की है पढ़ाई

इतना कुछ होने के बावजूद परवीन ने पढ़ाई भी की है। उन्होंने इंटर की परीक्षा तक दी है। राइटर की मदद से उन्होंने यह परीक्षा दी थी। परवीन की हिम्मत की दाद देनी चाहिए कि इतना कुछ करने के बाद भी उन्होंने जिंदगी में हार मानना स्वीकार नहीं किया है।

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