इंजीनिरिंग के बाद मिली 30 हजार की जॉब ठुकरा खेती में किया कमाल, लाखों का मुनाफा

पटना

अक्सर हम अच्छी नौकरी की तलाश में बड़े बड़े शहरों का रुख करते हैं। बड़ी बड़ी डिग्रियां हासिल करते हैं। लेकिन कॉर्पोरेट दुनिया में काम करने वाले सभी लोग जानते हैं कि यहां आपकी क्षमता और काबिलियत के साथ अक्सर ही न्याय नहीं होता। कभी सैलरी काफी कम रहती है तो कभी काम का दबाव इतना ज्यादा कि आदमी डिप्रेशन और ब्लड प्रेशर का मरीज बन जाता है। शहरीपन के ख्याल ने हमें एक ऐसी अंधी दौड़ में उलझा दिया है कि हम ठहर कर सोच भी नहीं पा रहे हैं। लेकिन इसी में कुछ लोग ऐसे हैं जो ठहर कर सोच रहे हैं और सुखी जीवन के लिए लीक से हटकर फैसले भी ले रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी बिहार के नालंदा जिले के आलोक कुमार की है।

नौकरी छोड़ खेती शुरू की

नालंदा के आलोक ने गुजरात की एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और पंजाब की एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में मिलाजुलाकर अपनी पढ़ाई पूरी की। 2016 में उनकी पढ़ाई के बाद नौकरी लगी। सैलरी प्रति महीने थी 30 हजार रुपये। आलोक को लगा कि जितनी मेहनत वो यहां कर रहे हैं उस हिसाब से उन्हें न तो सैलरी मिल रही है और न ही संतुष्टि। ऐसे में इसी को नियति न मानकर उन्होंने गांव लौटने का फैसला किया।

परंपरागत खेती से अलग काम किया

आलोक ने नौकरी छोड़ कर खेती को पेशा तो बनाया तो लेकिन परंपरागत खेती से अलग काम किया। उन्होंने गांव लौट जरबेरा फूल की खेती शुरू की। उन्होंने सात किस्मों के जरबेरा की खेती की। आपको बता दें कि जरबेरा का इस्तेमाल बागवानी और सजावट में किया जाता है। इसके अलावा उन्होंने पीली शिमला मिर्च की खेती भी ट्रायल के रूप में शुरू की। इन दोनों चीजों के अलावा बाहरमासी सहजन और पपीते की भी खेती की। आज स्थिति है कि ये हर साल 10-12 लाख रुपये का इन्वेस्ट कर 20 लाख से अधिक की कमाई कर रहे हैं।

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