एक दिलचस्प कहानी : जब तेरह दिनों के लिए टीचस बन गये थे देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद

पटना : देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. . राजेन्द्र प्रसाद को डुमरांव से काफी लगाव था। वे स्वतंत्रता के आंदोलन के समय कई बार डुमरांव में कदम रख चुके थे। राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने एक शिक्षक के रूप में 13 दिनों तक डुमरांव राज हाई स्कूल में बच्चों को पढ़ाया था। विद्यार्थियों को यह संयोग तब मिला था जब उनके बड़े भाई महेन्द्र प्रसाद तेरह दिनों के लिए अवकाश पर चले गए थे। वर्तमान का राज प्लस टू विद्यालय उस समय राज बहुद्देशीय विद्यालय के नाम से जाना जाता था। यह विद्यालय डुमरांव राज परिवार ने 1866 में स्थापित किया था। जिसमें डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के बड़े भाई शिक्षक के रूप में कार्यरत थे। देशरत्न डॉ. . राजेन्द्र बाबू डुमरांव में पहली बार इसी विद्यालय में पहुंचे थे। यह तब की बात थी, जब वे राष्ट्रीय आंदोलन के सक्रिय भागीदारी रहे।

जब वे देश के राष्ट्रपति बने तब 3 अक्टूबर 1959 को दुबारा राज अस्पताल डुमरांव में एक्स-रे का उद्घाटन करने पहुंचे थे। उस वक्त राज अस्पताल में उन्होंने कुछ देर तक समय भी दिया था। आज भी उनकी तस्वीरें अस्पताल की दीवारों को सुशोभित कर रही है। वहां टंगी तस्वीरें उनकी यादों को ताजा करते रहती है।
शिक्षा के प्रति देशरत्न राजेन्द्र बाबू का काफी लगाव था। वे नहीं चाहते थे कि किसी पढ़ाई प्रभावित हो। जैसा की लोग चर्चा करते हैं। उनके बड़े भाई महेन्द्र प्रसाद बीमार पड़ जाने के बाद अवकाश पर चले गए थे। जिसको ध्यान में रखते हुये उन्होंने यहां 13 दिनों तक इस विद्यालय में अपना समय दिये थे। इस विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने वालों में रेलवे बोर्ड के उच्च पद को सुशोभित करने में बिंदु राय पूर्व डीजीपी स्व आर आर प्रसाद, सांसद अनवर अली आदि प्रमुख रहे।
सबसे बड़ी बात यह है कि राज हाई स्कूल और राज अस्पताल में भी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भुला दिए गए हैं। इनकी जयंती पर अब न को इन्हें कोई याद करता है और न ही कोई कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। लोगों की मानें तो डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के नाम पर यहां कार्यक्रम वगैरह होता या कोई प्रतीक चिन्ह होती तो शायद आने वाली पीढ़ी इनके बारे में यह जान सकती कि यहां देश के प्रथम राष्ट्रपति ने शिक्षक के रूप में पढ़ाया था। आज भी स्थानीय लोगों के बीच में इसका मलाल रहता है।

 

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