अधूरे छपे नकली नोट प्रिंटर पर रखा हुआ है। Image Source : Agencies

…और बंटी घर पर कलर प्रिंटर लगा छापने लगा 100, 200, 500, दो हजार के नोट, भंजाने लगा बनारस में

Patna : लगता है आपदा में अवसर की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह को बिहार में लोगों ने कुछ गलत ढंग से परिभाषित कर लिया। ऐसे-ऐसे अवसर ढूंढने लगे कि पूछिये ही मत। इसमें बेहद आम शगल बन गया नोट छापने का। जगह जगह लोगों ने नकली नोट छापने का घरेलू उद्योग शुरू कर लिया। हाल ही में बक्सर में ऐसा एक घरेलू उद्योग पकड़ा गया, जिसमें पिता, पुत्र, भतीजा सब शामिल थे। अब सीवान में बंटी और बबली के नोट छापने के घरेलू कारखाने को पकड़ा गया है। छह लाख रुपये के नकली नोट भी मिले हैं, जो 100, 200, 500 के हैं। पकड़ा है उत्तर प्रदेश पुलिस ने, क्योंकि भाईलोग बहुत चतुर थे। पैसा तो सीवान में छाप रहे थे लेकिन इसको भंजा रहे थे उत्तर प्रदेश के वाराणसी, प्रयागराज आदि शहरों में। कहीं से उत्तर प्रदेश पुलिस को नकली नोट पकड़े जाने की लीड मिली और एक छोर को पकड़कर पुलिस दूसरी छोर पर स्थित नोट छापने के घरेलू उद्योग तक पहुंच गई।

अपराधियों के पकड़े जाने के बाद मीडिया से बात करते हुये पुलिस अफसर।

बक्सर में पकड़े गये जाली नोट के गिराेह की खबर विस्तार से यहां पढ़ें – https://bihar.express/as-soon-as-unemployed-started-printing-notes-at-home-father-and-brother-also-in-business-printer-laptop-note-punching-machine-seized/

उत्तर प्रदेश पुलिस को पहले लगा था कि यह पाकिस्तानी गैंग का काम है। कुछ बड़ा हाथ लगेगा। लेकिन अंत में कुछ अपने ही लोग हाथ लगे जो कोरोना महामारी में बेरोजगार होने के बाद नोट छापने के काम को अवसर मान बैठे। सीवान के गौरैयाकोठी थाना इलाके में जाली नोट छापने का काम शुरू कर दिया। एक दिन पहले पुलिस ने गौरैयाकोठी से जाली नोट छापनेवाले चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। उत्‍तर प्रदेश एटीएस और बिहार पुलिस की संयुक्त छापेमारी में सबकुछ सामने आ गया। नोट छापने वाले इस गिरोह के बदमाशों के पास से लोडेड देसी कट्टा भी बरामद किया गया है।
छापेमारी दल ने गिरोह के चार सदस्यों को करीब छह लाख से अधिक की जाली करेंसी और अर्ध निर्मित रुपये के अलावा प्रिंटर, कागज के साथ धरदबोचा है। दरअसल वाराणसी में जाली नोट के मामले में छानबीन के दौरान यूपी पुलिस के सामने सिवान जिले के गोरेयाकोठी निवासी बंटी कुमार का नाम सामने आया था। इसके बाद गोरेयाकोठी निवासी बंटी कुमार, चमरटोली निवासी सुरेश कुमार, टंडवा पिपरा निवासी रंजीत कुमार और गोपालगंज जिला के मांझगढ़ थाना क्षेत्र के मधु सरेया निवासी संदीप कुमार की गिरफ्तारी हुई।
बंटी के पास से दो प्रिंटर मिले, जिनका इस्तेमाल जाली नोट छापने के लिये किया जा रहा था। पुलिस को एक सौ, दो सौ, पांच सौ एवं दो हजार रुपया के अर्धनिर्मित जाली नोट तथा नोट छापने का कागज बरामद हुआ। बंटी के घर की गहन तलाशी लेने पर बैग में बंडल बनाकर रखा हुआ एक सौ, दो सौ, पांच सौ, दो हजार रुपये के काफी मात्रा में जाली नोट बरामद हुये।
बंटी ने बताया कि वह पहले छपरा के बनियापुर के रहने वाले एक व्यक्ति और गोरेयाकोठी के एक व्यक्ति के साथ मिलकर जाली नोट छापकर बाजार में चलाने का काम करता था। कुछ दिन इधर-उधर रहने के बाद नोट छापने की मशीन आदि की व्यवस्था कर स्वयं इस धंधे को शुरू कर दिया। पुलिस इस कांड में छपरा के एक व्यक्ति सहित कुछ अन्य की तलाश कर रही है। उसकी निशानदेही पर गोपालगंज से भी टीम ने गिरोह के एक तस्कर को गिरफ्तार कर लिया।
सीवान एसपी अभिनव कुमार ने बताया – गोरेयाकोठी में जाली नोट छापने का यह धंधा पिछले डेढ़ साल से बिल्कुल सुनियोजित ढंग से चल रहा था। इसमें सौ, दो सौ, पांच सौ और दो हजार के जाली नोटों को बिल्कुल ऑरिजनल की तरह छापा जाता था। हो सकता है कि इनके द्वारा छापे गये जाली नोट सीवान के मार्केट में भी आ गये हों। गिरोह का मुख्य सरगना बंटी सारण के बनियापुर के किसी परिचित के साथ मिलकर जाली नोट छापने का काम करता था, और कुछ दिन बाद अपने घर पर ही बिहार और यूपी के कुछ दोस्तों के साथ मिलकर जाली नोट छापने लगा।

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