असम के सीएम की फाइल फोटो। Image Source : Photo tweeted by sarma offiial acount

असम CM का ऐलान- दो से ज्यादा बच्चों के परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं देंगे

New Delhi : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार को कहा कि असम सरकार राज्य द्वारा वित्त पोषित विशिष्ट योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने के लिये धीरे-धीरे दो बच्चों की नीति लागू करेगी। सरमा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण नीति, हालांकि, असम में सभी योजनाओं पर तुरंत लागू नहीं होगी, क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा कई लाभ दिये जाते हैं। यानी असम सरकार की योजनाओं का लाभ वैसे लोगों को नहीं मिल पायेगा जिनके दो से अधिक बच्चे हैं। असम सरकार के इस फैसले का व्यापक असर होने वाला है। इसके दूरगामी प्रभाव पड़ेंगे और एक तरह स भाजपा के समर्थक इस फैसलों को हाथोंहाथ लेंगे।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा- कुछ ऐसी योजनाएं हैं जिनके लिये हम दो बच्चे की नीति नहीं लागू कर सकते हैं, जैसे कि प्रधानमंत्री आवास योजना, स्कूलों और कॉलेजों में मुफ्त प्रवेश प्राप्त करना आदि। लेकिन कुछ योजनाओं के मामले में इसे लागू किया जायेगा। जैसे यदि राज्य सरकार द्वारा आवास योजना शुरू की जाती है, तो दो बच्चों के मानदंड को प्रभावी किया जा सकता है। धीरे-धीरे बाद के चरणों में प्रत्येक राज्य सरकार की योजना में जनसंख्या मानदंड का अनुपालन सुनश्चित किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी की आलोचना की। विपक्षी दल मुख्यमंत्री पर सवाल उठा रहा है कि उनके अपने परिवार में पांच भाइयों का परिवार है। विपक्षी दल यही नहीं रुके। पूरे प्रकरण में उनके माता-पिता को भी लपेट लिया। उन्होंने कहा- हमारे माता-पिता या अन्य लोगों ने 1970 के दशक में क्या किया, इस बारे में बात करने का कोई मतलब नहीं है। विपक्ष ये अजीब बातें कह रहा है और हमें 70 के दशक में वापस धकेल रहा है। मुख्यमंत्री, जिन्होंने पिछले महीने पदभार ग्रहण किया था, सरकारी योजनाओं के तहत लाभों का उपयोग करने के लिये दो बच्चों के नियम की वकालत करते रहे हैं।
10 जून को सरमा ने तीन जिलों में हाल ही में बेदखली के बारे में बात की थी और अल्पसंख्यक समुदाय से गरीबी को कम करने के लिये जनसंख्या नियंत्रण के लिए “सभ्य परिवार नियोजन नीति” अपनाने का आग्रह किया था। उन्होंने प्रवासी मुस्लिम समुदाय पर बड़े परिवारों के होने का भी आरोप लगाया था जिससे रहने की जगह कम हो जाती है और परिणामस्वरूप भूमि अतिक्रमण हो जाता है। मुस्लिम समुदाय में मजबूत आधार वाले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) पार्टी सहित विभिन्न स्तर से इसकी तीखी आलोचना भी हो रही है।
असम में वर्तमान में असम पंचायत अधिनियम, 1994 में 2018 में एक संशोधन के अनुसार पंचायत चुनाव लड़ने के लिये न्यूनतम शैक्षिक योग्यता और कार्यात्मक स्वच्छता शौचालय की आवश्यकताओं के साथ दो बच्चों का नियम प्रभावी है। सरमा ने यह भी कहा कि एआईयूडीएफ के प्रमुख और सांसद बदरुद्दीन अजमल ने महिला शिक्षा पर सरकार के जोर की सराहना की है, जिसका जनसंख्या नियंत्रण के साथ संबंध है। उन्होंने कहा – बदरुद्दीन अजमल ने कल मुझसे मुलाकात की। उन्होंने महिला शिक्षा पर हमारे द्वारा दिये जा रहे महत्व की सराहना की।

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