6 साल की उम्र में गुड्डी ने दी थी पिता को मुखाग्नि, घास काटने वाली से यूं कराटे चैंपियन बनी बिहार की बेटी

पटना 

चिंगारी हौसलों की, चिराग आंसुओं के। मुजफ्फरपुर के मोतीपुर प्रखंड के डकही गांव की रहने वाली गुड्डी की कहानी कुछ ऐसी ही है। जब उसकी उम्र केवल 6 साल की थी, तभी वह अनाथ हो गई थी। पहले तो पिता चल बसे। उसके 6 महीने के बाद ही मां का भी साथ छूट गया था। मां को मुखाग्नि गुड्डी ने ही दी थी।

संघर्ष की शुरुआत

यह बात जरूर है कि मुंहबोली मौसी ने गुड्डी को रख लिया था, लेकिन घास काटने के काम में उन्होंने उसे लगा दिया था। गुड्डी के पिता रामाशीष भगत की मौत हो जाने के बाद जब मां भी चल बसी थीं और छोटी बहन के साथ ननिहाल से गांव लौटने पर चाचा ने घर में प्रवेश देने से मना कर दिया था तो गुड्डी के पास और कोई चारा भी नहीं बचा था।

पढ़ने की चाहत

मौसी के यहां वह रही तो जरूर, लेकिन घास काटने के काम में लग जाने की वजह से उसकी पढ़ाई के अरमान अधूरे रह जा रहे थे। शिव भगत नाम के एक साधु कस्तूरबा गांधी स्कूल के सामने रहते थे। उन्होंने गुड्डी की मदद की। वार्डन दीदी से उसे मिलवाया। गुड्डी ने भी दिन-रात पढ़ाई की। आखिरकार उसे छठी में दाखिला मिल गया।

कराटे में दिखाया दमखम

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स्कूल में कराटे वह सीखने लगी। इसमें उसकी रुचि बढ़ती जा रही थी। वर्ष 2012 में प्रखंड स्तर की प्रतियोगिता हुई। गुड्डी ने न केवल इसमें हिस्सा लिया, बल्कि वह विजेता भी रही। इसके बाद तो उसकी कामयाबी का सिलसिला चल पड़ा। इसके अगले ही साल न केवल जिला स्तर, बल्कि राज्य स्तर पर भी वह अव्वल रही।

मुख्यमंत्री से सम्मान

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आखिरकार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भी उसे भाग लेने का मौका मिल गया। दिल्ली में वर्ष 2014 में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता हुई। इसमें भी वह प्रथम आई। इसके बाद तो गुड्डी आगे बढ़ती चली गई। ढेरों पुरस्कारों से उसे सम्मानित किया गया। वर्ष 2015 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन 8 मार्च को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी गुड्डी को सम्मानित किया।

सरकारी सेवा के लिए

समाज कल्याण और शिक्षा विभाग के साथ कई सामाजिक संगठनों की ओर से भी गुड्डी को पुरस्कार प्रदान किए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी गणेश दत्ता झा का कहना है कि अनाथ होने के बावजूद इस लड़की ने जिस तरह से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया है, वह दर्शाता है कि उसमें प्रतिभा कितनी कूट-कूट कर भरी हुई है।

गणेश दत्त ने यह भी कहा कि सरकारी सेवा में गुड्डी के समायोजन के लिए सरकार से वे अनुशंसा करने जा रहे हैं। अभाव की जिंदगी जीने के बाद भी जिस तरह से गुड्डी ने अपने जीवन में सफलता हासिल की है, वह किसी के लिए भी किसी प्रेरणा से कम नहीं है।

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