पशुपति कुमार पारस और चिराग पासवान की फाइल फोटो। Image Source ; Social Media

चुनाव चिह्न ‘बंगले’ के इस्तेमाल पर रोक, उपचुनाव में नये सिंबल पर प्रत्याशी उतारना होगा चिराग को

New Delhi : चुनाव आयोग ने शनिवार को चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस गुटों को लोक जनशक्ति पार्टी या उसके चुनाव चिह्न ‘बंगले’ के नाम का इस्तेमाल करने से तब तक रोक दिया है जब तक कि चुनाव आयोग प्रतिद्वंद्वी समूहों के बीच विवाद का निपटारा नहीं कर देता। चुनाव आयोग ने अंतिम फैसला आने तक दोनों गुटों को 4 अक्टूबर (सोमवार) दोपहर 1 बजे तक अपने-अपने गुटों के लिये नया सिम्बल देने को कहा है। चुनाव आयोग ने तीन विकल्प भी देने को कहा है, जिनमें से प्रत्येक समूह को चुनाव चिन्ह आवंटित किये जायेंगे। इसके बाद गुट बिहार के कुशेश्वर और तारापुर में आगामी उपचुनाव के लिये अपने-अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतार सकते हैं। चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि दोनों गुट ‘लोक जनशक्ति पार्टी’ के नाम का इस्तेमाल भी नहीं कर पायेंगे।

आदेश में कहा गया है- दोनों समूहों को ऐसे नामों से जाना जायेगा, जो वे अपने संबंधित समूहों के लिये चुन सकते हैं, जिसमें वे चाहें तो अपनी मूल पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी के साथ संबंध भी शामिल कर सकते हैं। बिहार की दो विधानसभा उपचुनाव सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है।
चिराग पासवान ने शुक्रवार को चुनाव आयोग के कार्यालय का दौरा किया था और मांग की थी कि पार्टी का चुनाव चिन्ह उनकी पार्टी के पास बना रहे। लोजपा के एक धड़े का नेतृत्व चिराग पासवान कर रहे हैं और दूसरे धड़े का नेतृत्व उनके चाचा और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री पारस कर रहे हैं।
लोजपा में संकट तब शुरू हुआ जब इस साल जून में पांच सांसदों की मदद से पशुपति पारस ने पटना में खुद को पार्टी अध्यक्ष घोषित किया। पिछले साल लोजपा नेता रामविलास पासवान के निधन के बाद उनके बेटे चिराग पासवान और दिवंगत नेता के भाई पारस में रस्साकशी चल रही थी।
पिछले कुछ वर्षों में इस तरह के दो मामले सामने आ चुके हैं। 2017 में समाजवादी पार्टी (साइकिल) और अन्नाद्रमुक (दो पत्ते) की टूट को लेकर। इन दोनों केस में चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद देखा गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *