Representative image of gold ore. Image Source : tweeted by @KaragweI

मानो या न मानो- बिहार है भारत में सोने की खान, देश का 42% सोना बिहार में, कर्नाटक का दोगुना

Patna : मानो या न मानो, लेकिन देश के सबसे गरीब राज्यों की सूची में शुमार हो चुके अपने बिहार में देश की सोने की खान है। हां, यकीन मानिये। यह सच है। देश के सबसे बड़े संसाधन सोने का अयस्क बिहार प्रदेश में ही है। यह खुलासा केंद्रीय खान, कोयला और संसदीय मामलों के मंत्री ने सोमवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में किया। संसद में प्रस्तुत देश में स्वर्ण संसाधन (पहचाने गये भंडार सहित) पर राष्ट्रीय खनिज सूची डेटा से पता चलता है कि बिहार में 222.8 मिलियन टन (एमटी) का स्वर्ण अयस्क संसाधन है या देश के कुल स्वर्ण अयस्क संसाधन का 42.21 प्रतिशत उपलब्ध है। यह कर्नाटक से कहीं अधिक है, जो अपने पुराने कोलार गोल्ड फील्ड्स के साथ सोने के खनन की पारंपरिक जमीन मानी जाती है। खान मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक का स्वर्ण अयस्क संसाधन बिहार के लगभग 103.84 मीट्रिक टन का आधा है।

बिहार के सोने के संसाधन के बारे में रहस्य और गहरा हो जाता है क्योंकि राज्य में अब तक एक इंच भी खनन योग्य भूमि का उपयोग नहीं किया गया है और एक औंस सोने का अयस्क भी नहीं खोदा गया है। बिहार, पारंपरिक रूप से देश के रोडमैप में लगभग नगण्य उपस्थिति में पहुंच चुका है। पूर्व में खनिज समृद्ध बिहार की खेदजनक स्थिति झारखंड के अलग होने के बाद हो गई। राज्य से अलग होने के बाद सभी खनन योग्य भूमि झारखंड में चली गई और बिहार में भाषाई चलन के हिसाब से केवल बालू और आलू ही रह गया। देश में स्वर्ण अयस्क संसाधन पर संसद में प्रस्तुत आंकड़े भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) द्वारा उपग्रह चित्रों और जमीनी सर्वेक्षणों के गहन अध्ययन के बाद दिये गये हैं। इसलिए, खनन मंत्रालय के इस रिपोर्टजनक दावे को कुछ हद तक विश्वसनीयता मिलती है। लेकिन सच्चाई यही है कि अगर बिहार में इतना बड़ा संसाधन उपलब्ध है तो उसका अब तक दोहन क्यों नहीं किया गया?
दरअसल बिहार में पहचाने जाने वाले बहुत सारे स्वर्ण अयस्क संसाधन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आते हैं, जिससे सरकारी एजेंसियों के लिये संभावनाओं पर शोध करने का काम और मुश्किल हो जाता है। सर्वेक्षण किये गये स्वर्ण अयस्क भंडार मुख्य रूप से बिहार के गया, राजगीर और जमुई जिलों में हैं। वर्ष 2020-21 में गया के अजयनगर प्रखंड और पश्चिम चंपारण के शिवालिक हिमालय क्षेत्र में स्वर्ण अयस्क की खोज की परियोजनाएं शुरू की गई हैं। उम्मीद है कि प्रारंभिक कार्य के परिणामस्वरूप राज्य में विवरण की खोज होगी जो राज्य को समृद्ध पीली धातु पर फिर से चमकने में मदद करेगी।

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