बिहार: बाइक रिपेयरिंग करने वाली की बेटी ने नीट में लहाराया परचम, सारे अरमान किए पूरे

पटना

अमीर पारिवारिक बैकग्राउंड निश्चित तौर पर आपको आगे बढ़ने में मदद करता है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि अगर परिवार मध्यम या गरीब श्रेणी का हो तो बच्चे आगे नहीं बढ़ सकते। इसी बात को साबित किया है बिहार की बेटी आकांक्षा ने। अपने पहले ही प्रयास में नेशनल इलिजिबिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट को पास करने वाली इस बेटी की पारिवारिका पृष्ठभूमि आर्थिक रूप से कुछ खास नहीं है। फिर भी अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के भरोसे आकांक्षा ने पहले प्रयास में नीट में 1547 रैंक हासिल की है। आपको बता दें कि आकांक्षा मुजफ्फरपुर के माड़ीपुर की रहने वाली हैं। आकांक्षा के पिता माड़ीपुर में बाइक रिपेयरिंग का छोटा सा कारोबार चलाते हैं।

दिल्ली के इन कॉलेजों में पढ़ना चाहती है बिटिया

ये आकांक्षा के परिजनों का किया गया पुण्य और जीवन में बरती गई ईमानदारी का ही परिणाम है कि आज उनके सारे बच्चे सेटल हैं। आकांक्षा का बड़ा भाई दिवाकर वाराणसी से इंजीनियरिंग कर चुका है। जबकि एक भाई उज्ज्वल आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग कर रहे हैं। अब ऐसे होनहार भाइयों की इस बहन को भी जहीन तो होना ही था, सो आकांक्षा ने नीट क्लियर कर इसे साबित भी कर दिया। आकांक्षा बताती हैं कि इस रैंक में उसे मेडिकल कॉलेज मिल जाएंगे लेकिन उनकी तमन्ना तो दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज या लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई की है।

मां ने बेटी की मेहनत को दिया पूरा श्रेय

आकांक्षा की मां रेणु सिंह गृहिणी हैं। वो इस सफलता का पूरा श्रेय अपनी बेटी की मेहनत को देती हैं। आकांक्षा ने नीट में 720 अंकों में से 666 अंक हासिल किए हैं। आकांक्षा कोटा में रहकर इस प्रतिष्ठित परीक्षा की तैयारी में जुटी थीं। आकांक्षा के पिता बताते हैं कि तीन-तीन बच्चों के लिए इंजीनियरिंग और मेडिकल का सपना देखना उनके लिए इतना भी आसान नहीं था। आखिर एक ऑटोमोबाइल के छोटे से कारोबार से आमदनी ही कितनी होती है, लेकिन उन्होंने बच्चों की लगन और मेहनत से प्रेरणा हासिल की। वो भी किसी मामले में कभी पीछे नहीं हटे।

आकांक्षा का परिवार मूल रूप से मधुबनी का रहने वाला है। लेकिन दो दशकों से अधिक समय से आकांक्षा के पिता दिनेश सिंह मुजफ्फरपुर में आकर बस गए हैं। आकांक्षा ने अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई मुजफ्फरपुर के एक स्थानीय स्कूल से ही की है। आकांक्षा ने लॉकडाउन के दौरान भी अपने मन पर नियंत्रण कर नीट की पढ़ाई के लिए पढ़ाई के घंटों को और भी बढ़ा दिया था। सामान्य रूप से रोजाना उन्होंने 9-10 घंटे की पढ़ाई की। इसी कड़े परिश्रम के दम पर बिहार की बेटी ने आज कामयाबी की नई मिसाल कायम की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *