सबके सामने PM मोदी से बोली पूर्णिया की बेटी- ग्रेजुएट हूं पर रोजगार नहीं, जवाब ये आया

पटना
पीएम मोदी ने गुरुवार को बिहार में मत्स्य संपदा योजना का शुभारंभ करते हुए एक तरह से अपनी चुनावी रैली का भी आगाज किया। पीएम मोदी ने एक वर्चुअल कार्यक्रम में बिहार के अलग-अलग जिलों के लिए 294 करोड़ से अधिक की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और इसे देख पीएम मोदी ने अपनी तरफ से कोई कसर भी नहीं छोड़ी। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत भोजपुरी भाषा से की ताकि इस कार्यक्रम के माध्यम से बिहार की एक बड़ी जनसंख्या भी संबोधित हो जाए। लेकिन लाइव कार्यक्रम में पूर्णिया की बेटी ने एक ऐसी बात कह दी जिसके चर्चे अब सोशल मीडिया पर हैं।

असल में पीएम मोदी ने बिहार में मत्स्य संपदा योजना के शुरुआत के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कई लोगों से बात की। ये सभी मछली पालन, डेयरी उद्योग या पशुपालन से जुड़े लोग थे। पीएम मोदी ने इस वर्चुअल कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूर्णिया में मरंगा फ्रोजेन सीमेन बैंक का उद्घाटन भी किया। इसे पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा सीमेन बैंक है बताया जा रहा है। यहीं से पीएम मोदी ने पूर्णिया की मोनिका भारती से भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात की।

जब सबके सामने मोनिका बोली- ग्रेजुएट हूं पर नौकरी नहीं मिली
पीएम मोदी मोनिका भारती से उनके बारे में पूछ ही रहे थे कि लाइव कार्यक्रम में मोनिका कुछ ऐसा बोल उठीं, जिससे मोदी संग अधिकारी भी असहज जरूर हो उठे होंगे। पीएम मोदी ने मोनिका भारती से पूछा कि आपके घर में कौन है। मोनिका ने बताया कि वो, उनके पति, दो, बच्चे, भैया-भाभी उनके तीन बच्चे, दादी और सास-ससुर हैं। इसके बाद पीएम मोदी ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि बड़ा विशाल परिवार है।

फिर पीएम मोदी ने पूछा कि पशुपालन के अलावा कुछ और भी काम करती हैं या इससे ही गुजारा चल जाता है। इसपर मोनिका ने जवाब दिया, ‘ग्रेजुएट किए हैं लेकिन कोई रोजगार नहीं मिला है तो इसी से गुजारा चल रहा है।’ हालांकि पीएम मोदी ने फिर जरूर पूछा कि किस विषय में ग्रेजुएशन किया है। तब मोनिका ने बताया कि हिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया है। फिर पीएम मोदी ने मोनिका से पशुपालन के संबंध में सवाल पूछने शुरू कर दिए।

सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया ये संवाद
पीएम मोदी और पूर्णिया की मोनिका भारती के बीच सोशल मीडिया पर हुआ ये संवाद चर्चा का विषय बन गया। एक तरफ लोग जहां इस संवाद में सकारात्मकता तलाश रहे थे, वहीं दूसरे तरफ लोग यह भी चर्चा कर रहे थे कि मोनिका ने अनजाने में ही सही, बिहार समेत पूरे भारत के युवाओं का दर्द लाइव कार्यक्रम में बता दिया है। मोनिका का ये कहना कि ग्रेजुएट हूं पर नौकरी नहीं, ये करोड़ों युवाओं की कहानी है। खासतौर से बिहार में बेरोजगारी इस बार का एक अहम चुनावी मुद्दा भी बनने जा रहा है।

हालांकि पूर्णिया के डीएम राहुल कुमार ने इस संवाद को अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर करते हुए मोनिका की तारीफ भी की। डीएम राहुल कुमार ने लिखा, ‘पूर्णिया की मोनिका भारती जी ने जिस आत्मविश्वास के साथ माननीय प्रधानमंत्री के साथ संवाद किया यह सभी जिलावासियों के लिए गर्व का विषय है।’ लेकिन नौकरी को लेकर मोनिका का ये सवाल धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर और अधिक चर्चा का विषय बन रहा है।

तेजस्वी भी लगातार उठा रहे रोजगार का मुद्दा
कोरोना लॉकडाउन के दौरान देशभर में अलग-अलग जगहों पर काम करने वाले मजदूरों को वापस लौटना पड़ा है। लॉकडाउन ने जीडीपी को सबसे खराब दौर में लाकर खड़ा कर दिया है। कंपनियों को रोजगार में कटौती करनी पड़ी है। इसका सर्वाधिक असर जिन राज्यों में पड़ा है, उनमें बिहार भी है। तेजस्वी पिछले काफी दिनों से बिहार में रोजगार के मुद्दे को उठा रहे हैं और इसे लेकर नीतीश सरकार पर निशाना साध रहे हैं।

9 सितंबर को राजद ने सोशल मीडिया पर #9बजे9मिनट हैशटैग से रोजगार के मुद्दे पर प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन को सोशल मीडिया पर काफी रिऐक्शन मिले। यहां तक कि समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव और डिंपल यादव ने भी इस मुहिम के समर्थन में ट्वीट किया। तेजस्वी दावा कर रहे हैं कि बिहार में बेरोजगारी 40 साल में सर्वाधिक उच्च स्थिति में है। पिछले दिनों जदयू की वर्चुअल रैली के बाद भी तेजस्वी ने कहा था कि सीएम नीतीश रोजगार पर कुछ बोल नहीं रहे।

रोजगार को लेकर सोशल मीडिया पर अभियान चलाने के बाद तेजस्वी ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा था, ‘युवाओं को लादे हुए मुद्दे नहीं चाहिए। उन्होंने अपना मुद्दा चुन लिया है। युवा जाति-धर्म से ऊपर उठकर अच्छी शिक्षा-चिकित्सा और नौकरी-रोजगार की बात कर रहे हैं। कल बेरोज़गारी को लेकर स्वतःस्फूर्त कार्यक्रम ऐतिहासिक रूप से सफल रहा।’

हालांकि पिछले दिनों कैबिनेट बैठक में नीतीश सरकार ने कुछेक विभागों में सरकारी नौकरियों की घोषणा की है। लेकिन पहले की गई घोषणाएं अभी लंबित हैं, इसलिए लोग इनपर भी सवाल पूछ रहे हैं। हालांकि नीतीश सरकार का दावा है कि राज्य की विभिन्न योजनाओं के मद्देनजर लोगों को न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार दिया जा रहा है बल्कि मत्स्य संपदा जैसी योजनाओं से लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की भी कोशिश हो रही है। ऐसे में अब देखना यह है कि चुनाव में जनता किसकी बात सुनती है। सरकार की या विपक्ष की?

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