बिहार: किसान ने गोभी का खेत ट्रैक्टर से जोता, 1 रुपये था भाव, सरकार तक पहुंचाइए ये बात

पटना

आज मन उदास है। बचपन में बाबा भारती और उनके घोड़े की कहानी हम सबने पढ़ी है। उसमें लिखा था कि एक किसान को जैसे अपने लहलहाती फसल को देखकर खुशी होती है, वैसी ही खुशी बाबा भारती को अपने घोड़े को देखकर होती थी। अब सोचिए जरा कि किसी किसान को अगर अपनी लहलहाती फसल को ट्रैक्टर लगाकर जोतना पड़ जाए तो उसका क्या हाल होगा। यही हुआ है बिहार के समस्तीपुर के किसान ओम प्रकाश यादव के साथ। ओम प्रकाश यादव मुक्तापुर के रहने वाले हैं और उन्होंने गोभी की खेती कर रखी थी।

4000 रुपये प्रति कट्ठा खर्च हुए थे

ओम प्रकाश यादव ने इस बार बड़ी लगन से गोभी की खेती की थी। इस खेती पर उन्हें प्रति कट्ठे के हिसाब से 4 हजार रुपये का खर्च पड़ा था। उन्होंने कुल 2 लाख रुपये की रकम लगाई थी। जब फसल तैयार हुई तो मंडी में गोभी एक रुपये किलो से भी नीचे के भाव पर पहुंच गई। अब सोचिए जरा कि जाड़ा, गर्मी, बरसात को बर्दाश्त कर खेती करते एक किसान के ऊपर ऐसे भाव से क्या बीती होगी। कुछ ऐसा ही हुआ ओम प्रकाश यादव के साथ।

पूरी फसल को ट्रैक्टर से जोत खत्म कर दिया

ओम प्रकाश यादव इतना आहत हुए कि उन्होंने पूरी खड़ी फसल को खुद ट्रैक्टर लगा कर जोत दिया। ओम प्रकाश के साथ ऐसा पहली बार नहीं, बल्कि दूसरी बार हो रहा है। अब ऐसी स्थिति आ गई है कि वह सब्जी की खेती से निराश हो चुके हैं। आपको बता दें कि परंपरागत खेती से इतर किसानों ने सब्जी की खेती से अपनी स्थिति सुधरने का ख्वाब देखा था। लेकिन ऐसे हालात रहे तो स्थिति सुधरने की बजाय और बिगड़ती ही जाएगी।

दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलनरत हैं किसान

किसानों की पीड़ा का यही हाल है इसीलिए देश के किसान पिछले 20 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। वे किसान बिलों को रद्द कराना चाहते हैं। एसोचैम के आकलन के मुताबिक किसानों के प्रदर्शन से रोजोना करीब 3000 से 3500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। दिल्ली ब़ॉर्डर के पास किसानों का जत्था बढ़ता ही जा रहा है। कोविड के बीच किसानों के प्रदर्शन ने सरकार की चिंता को और भी बढ़ा दिया है। किसानों संग सरकार की कई दौर की वार्ता भी विफल हो चुकी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *