बिहार की बेटी बनी ‘मिल्क लेडी’, PM से हुई सम्मानित, गरीब से लखपति बनने का उपाय इनसे सीखें

पटना
आज कोरोना संकट ने बड़े महानगरों में रोजगार के लाखों मौकों को निगल लिया है। लाखों की संख्या में बेरोजगार दिल्ली, मुंबई, सूरत जैसे बड़े-बड़े शहरों से बिहार लौट चुके हैं। लॉकडाउन में हमने बिहार के बेटे और बेटियों की बेबसी देखी है। आंखों में अपमान के आंसू लेकर दर-दर ठोकरें खाकर दूसरों के रहमों करम से न जाने कैसे ये लोग बिहार अपने घर पहुंचे। ऐसे में हम आपको घर में ही उद्यमशीलता की ऐसी सक्सेस स्टोरी की जानकारी दे रहे हैं जो आपको भी प्रेरणा देंगी। इसी क्रम में हम आपको बिहार के बांका की बेटी की इस कहानी को सुना रहे हैं। इस बेटी ने अपनी मेहनत से न केवल अपना जीवन बदला बल्कि गांव के गरीब किसानों के घर की महिलाओं को भी जोड़ उनका लखपति बनने का सपना पूरा किया।

आज मिल्क लेडी की तौर पर पहचान

DAIRY farm Kaler Arwal Bihar - YouTube

ये कहानी बांका जिले सिजुआ गांव निवासी सविता देवी की है। सविता देवी की शादी एक गरीब परिवार में हुई थी। लेकिन उनके मन में परिवार की आमदनी बढ़ाने को लेकर हमेशा ख्याल चला करते थे। वह अपने पति के साथ भी इसे लेकर अक्सर चर्चा करती रहती थीं। सविता और उनके पति चाहते तो अन्य लोगों की तरह कमाई बढ़ाने के लिए महानगरों का रुख कर सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने अपने गांव, समाज में ही रोजगार का फैसला किया। दोनों ने आपसी बातचीत में तय किया कि क्यों न एक गाय खरीदी जाए। इससे घर की दूध की जरूरत भी पूरी होगी और एक्स्ट्रा होने वाले दूध को बेचकर कुछ पैसे भी आ जाएंगे। 2007 में दोनों ने एक गाय और बछिया खरीदी। यानी आज से 13 साल पहले इस सफर की शुरुआत हुई और सविता आज बिहार की मिल्क लेडी के नाम से विख्यात हो चुकी हैं।

पर क्या ये सफर इतना आसान था?

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कोई भी सफर आसान कहां होता है। हां अगर आपके मन में कुछ करने की लगन हो तो कठिनाइयां आपको समझ में नहीं आतीं और आप मंजिल तक पहुंच ही जाते हैं। सविता देवी के मामले में भी कुछ ऐसा ही था। एक गाय और बछिया के साथ शुरू हुए उनके सफर में कुछ महीनों बाद एक और बछिया जुड़ गई। उसी गाय ने एक दूसरी बछिया दी थी। इस तरह आने वाले समय में सविता देवी के पास अब तीन गायें होने वाली थीं। अब उनका सपना था कि क्यों न एक बड़ा डेयरी फार्म खोला जाए। लेकिन सविता को पता था कि बिना किसी तकनीकी ज्ञान के अगर वो डेयरी फार्म खोलती हैं तो उन्हें मुश्किलों का सामना भी करना पड़ सकता है।

इस तरह से सीखा डेयरी का कौशल

डेयरी चलाने के तकनीकी ज्ञान को हासिल करने की उनकी लालसा कृषि विज्ञान केंद्र बांका में पूरी हुई। यहां पहुंचने पर वैज्ञानिकों ने उन्हें डेयरी और पशुपालन की बारीकियों से अवगत कराया। सविता ने पूरे मनोयोग से इन बारीकियों को सीखा। आज बांका के वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर उन्हें डेयरी से जुड़ा कोई भी प्रयोग करना होता है तो वो सविता देवी की ही डेयरी पर करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि सविता पूरे मनोयोग से जुटकर उस प्रयोग को सफल बनाती हैं। आज गांव की आमदनी अकेले सविता के प्रयासों से प्रेरणा पाकर दोगुनी हो चुकी है। गरीब किसान भी लखपति बने हुए हैं।

पीएम से मिला श्रेष्ठ किसान का पुरस्कार

सविता देवी की मेहनत के चर्चे दिल्ली तक हैं। पिछले साल बिहार की इस मिल्क लेडी को पीएम नरेंद्र मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रेष्ठ किसान पुरस्कार से सम्मानित किया। ये सम्मान दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उम्दा काम के लिए दिया गया। सविता दूध उत्पान के अलावा हारा चारा उत्पादन, पशु चॉकलेट उत्पादन, यूरिया उपचारित भूसा के उत्पादन की भी एक्सपर्ट हैं। सविता के गांव में मात्र 50 घर हैं। इसमें 35 घरों से अधिक महिलाओं को सविता ने डेयरी उत्पादन से जोड़ रखा है। इसी वजह से उनका गांव डेयरी उत्पादन में जिले का अव्वल गांव है।

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