बिहार में फंस जाएगी 11880 सिपाहियों की भर्ती? हाई कोर्ट ने पूछ दिया ये सवाल

पटना

बिहार में 11880 सिपाही की बहाली के मामले में पेच फंसता दिख रहा है। असल में हाई कोर्ट ने इस बहुप्रतिक्षित भर्ती को लेकर राज्य की नीतीश सरकार से सवाल पूछ दिया है। इस बहाली में होमगोर्ड को 50 फीसदी सीट आरक्षित की गई थी। अब पटना हाई कोर्ट ने इसी को लेकर जवाब-तलब किया है। सिपाही बहाली में होमगार्ड्स को आरक्षित सीट से कम सीट उपलब्ध कराने के कथित मामले को लेकर संतोष कुमार यादव व अन्य की तरफ याचिका दाखिल हुई थी। हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से सवाल पूछ दिया है।

जस्टिस शिवाजी पांडेय की सिंगलबेंच ने राज्य सरकार को 4 सप्ताह के भीतर जवाबी एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका दाखिल करने वालों के वकील अशोक कुमार ने पटना हाई कोर्ट को जानकारी दी थी कि बिहार में सरकार ने 11880 सिपाही भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इसमें से होमगार्ड के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई थीं। इसके बावजूद शारीरिक परीक्षा के लिए केवल 1388 को ही बुलाया गया।

भर्ती विज्ञापन को किया गया अनदेखा?

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि सिपाही चयन बोर्ड ने भर्ती विज्ञापन को अनदेखा करते हुए बहाली प्रक्रिया शुरू कर दी है। याचिका दाखिल करने वाले याची के वकील की दलील सुनने के बाद ही पटना हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से हलफनामा दाखिल करने को कहा है। हाई कोर्ट ने इसके लिए राज्य सरकार को 4 सप्ताह का समय भी दिया है। इसके बाद मामले की फिर से सुनवाई होगी।

5940 सीटें होमगार्ड के जवानों से भरनी थीं

बिहार में 20 जनवरी को 11880 सिपाही भर्ती के लिए परीक्षा का आयोजन किया गया था। इस परीक्षा में 12 लाख से अधिक कैंडिडेट शामिल हुए थे। इन 11880 पदों में से 50 प्रतिशत यानी 5940 सीटें होमगार्ड के जवानों से भरने के लिए सुरक्षित रखी गई थीं। जानकारी के मुताबिक पूरे प्रदेश से होमगार्डों के 3600 आवेदन ही आए। इनमें से भी मात्र 1388 को ही फिजिकल टेस्ट के लिए बुलाया गया। सिपाही भर्ती प्रक्रिया पर लगते ग्रहण से इसमें शामिल अभ्यर्थियों को मायूसी हाथ लगती दिख रही है।

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