बिहार: मिट्टी, गोबर, घास-फूंस से आरा में बना दिया विदेशों जैसा घर, प्रशांत की कहानी अद्भुत है

इंसान में कुछ करने का सच्चा जुनून हो तो वह क्या नहीं कर जाता है। इसका जीता-जागता उदाहरण बिहार के आरा के कलाकार प्रशांत हैं। कनाडाई शिक्षक बेन रीड-होवेल्स के साथ मिलकर प्रशांत ने वसुधैव राइड नाम से एक ऐसी यात्रा की थी, जिसमें उन्होंने भारत से लेकर नेपाल, तिब्बत, चीन, स्कॉटलैंड और यूनान जैसे 22 देश 30 महीने में मोटरसाइकिल से घूम डाले थे। इस यात्रा के दौरान उन्होंने दुनियाभर में वसुधैव कुटुंबकम का संदेश दिया। अलग-अलग समुदायों के लोगों को उन्होंने साथ लाकर उन्हें शांति और सामुदायिक कल्याण का महत्व बताया।

काम किया इन प्रोजेक्ट्स पर

प्रोजेक्ट पुष्कर के साथ प्रोजेक्ट लेस्बोस और प्रोजेक्ट बिहार आदि को अपनी इन ढाई साल की यात्रा के दौरान प्रशांत और बेन ने अंजाम दे दिया। प्रशांत बताते हैं कि शुरू में तो उन्हें मालूम ही नहीं था कि आखिर किस तरीके से वे अपनी इस यात्रा को पूरा करने वाले हैं। फिर उन्होंने रास्ता यह निकाला कि वे उस तरह के प्रोजेक्ट इस दौरान करेंगे, जिससे कि न केवल समुदायों को इसका लाभ मिलेगा, बल्कि वे भी समर्थ होते चले जाएंगे।

राजस्थान के पुष्कर में

मुंबई से इन्होंने अपनी यात्रा शुरू की थी। फिर वे राजस्थान पहुंच गए थे। यहां पर पुष्कर में उन्होंने 24 दिनों में उन चीजों का इस्तेमाल करके परिवार के रहने लायक घर बना दिया, जो पूरी तरीके से प्राकृतिक थे और जो बेकार के संसाधन थे। घर को तैयार करने में उन्हें सिर्फ 1 लाख रुपये खर्च करने पड़े। मिट्टी, वेस्ट प्लास्टिक, गोबर, घास, कांच की बोतल आदि से उन्होंने स्थानीय शैली में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए घर तैयार कर दिए।

कौशल प्रशिक्षण केंद्र

प्रशांत बताते हैं कि घर को बनाने में बहुत तरह के संसाधन भी बर्बाद हो जाते हैं, लेकिन हमने जो घर बनाया, वे बेकार की वस्तुओं से बने थे। एक कौशल प्रशिक्षण केंद्र बनाने का भी उन्होंने निर्णय लिया, जिससे कि बेकार और प्राकृतिक संसाधनों से न केवल घरों को निर्मित किया जा सके, बल्कि स्थानीय समस्याएं भी सुलझाई जा सकें।

तैयार किया सस्टेनेबिलिटी मॉडल

प्रशांत के मुताबिक एक सस्टेनेबिलिटी मॉडल भी उन्होंने तैयार कर लिया है। इसमें छत पर भोजन तैयार किया जा सकता है। इन हाउस वाटर ट्रीटमेंट प्लांट सिस्टम भी है, जो कि बेकार पानी को बिल्कुल शुद्ध कर देता है। प्रशांत कौशल विकास परियोजना के तहत अब तक 15 से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग भी दे चुके हैं। मेक्सिको, दक्षिण कोरिया, चेक गणराज्य, कनाडा, चिली और ट्यूनीशिया जैसे 30 से भी ज्यादा देशों से छात्र उनके यहां आकर इंटर्नशिप भी कर चुके हैं।

अपसाइकिलिंग की दिशा में

नेपाल में 2015 का भूकंप आने के बाद यहां पर उन्होंने एक सरकारी स्कूल में खेल के मैदान को डिजाइन किया था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए प्रशांत साल 2006 में पुणे चल गए थे। यहां आखरी सेमेस्टर में उन्होंने नौकरी करने की बजाय अपसाइकिलिंग की दिशा में कुछ करने का सोच लिया था। बेन से उनकी मुलाकात पुणे में एक फेस्ट के दौरान हुई थी, जिसके बाद उन्होंने वसुधैव राइड को शुरू किया था।

प्रशांत का बिहार प्रोजेक्ट

बिहार प्रोजेक्ट के बारे में प्रशांत बताते हैं कि यह उनके दिल के बहुत ही करीब रहा है। उन्होंने यहां 9 महीने रहकर एक घर तैयार किया। इसमें उन्होंने प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया। कुछ इस्तेमाल हो चीजों चीजों को भी उनके द्वारा प्रयोग में लाया। इस तरीके से उनकी लागत 40% तक कम हो गई। इस तरह से मिट्टी, गोबर घास-फूस आदि से आरा में उन्होंने कमाल का घर बना डाला। प्रशांत जो काम कर रहे हैं, वह बाकी लोगों के लिए भी किसी प्रेरणा से कम नहीं है।

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