पीएम आवास की प्रतीकात्मक तस्वीर। Image Source : Live Bihar

केंद्र सरकार से बिहार को मिले सबसे अधिक ‘आवास’, सूबे को मिलेंगे 13800 करोड़ रुपए

पटना : नए वित्तीय वर्ष 2022-23 में बिहार को केंद्र सरकार से सबसे अधिक पीएम आवास योजना का कोटा मिला है। पूरे देश में बिहार को इस योजना में सर्वाधिक कोटा दिया गया। सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश को भी इतना आवास कोटा नहीं मिला है। नए वित्तीय वर्ष में सूबे को 11.49 लाख आवास का आवंटन मिला है। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा बिहार सरकार को 13800 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इस बारे में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि सरकार 31 मार्च 2010 से पहले बने आवासों की मरम्मत के लिए भी 50 हजार रुपए दे रही है। इसके अलावा बिहार सरकार द्वारा एक जनवरी 1996 से पहले आवास योजना का लाभ लेने वालों को 1.20 लाख रुपए दिए जा रहे हैं। दरअसल, मंत्री बिहार विधान परिषद में बुधवार को ग्रामीण विकास विभाग का बजट पेश कर रहे थे। उस दौरान उन्होंने उपरोक्त जानकारियां दीं।

पीएम शहरी आवास योजना से बना मकान।

पीएम आवास बनाने के लिए जीविका दीदियां देंगी लोन
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हजारों लाभुकों का आवास निर्माण पूरा नहीं हो पाता है। हर वित्तीय वर्ष में ऐसे लाभुकों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में अब सरकार ने एक नई व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत सूबे की सवा लाख जीविका दीदियां अब लोगों के अधूरे आवास को पूरा कराएंगी। जीविका दीदियां प्रखंड विकास पदाधिकारी यानी बीडीओ, ग्रामीण आवास सहायक और ग्रामीण आवास पर्यवेक्षक से समन्वय बनाएंगी। इसके बाद जीविका समूह उन लाभुकों को आवास निर्माण पूरा कराने के लिए लोन दिलवाएंगी। इस बारे में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि इससे जुड़ी जानकारी सभी विभागों और अधिकारियों को उपलब्ध करा दी गई है। पांच से सात साल से लंबित आवासों को पूरा कराने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सूबे में चार लाख पीएम और तीन लाख इंदिरा आवास अधूरे
मंत्री ने बताया कि सूबे में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चार लाख मकान अधूरे बने हुए हैं। जबकि इंदिरा आवास योजना के तहत तीन लाख आवास अधूरे पड़े हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सबसे अधिक लंबित आवास समस्तीपुर जिले में हैं। यहां 34 हजार 519 आवास पूरा नहीं हुए हैं। दरभंगा जिले में 34 हजार 299, सीतामढ़ी में 25 हजार 914, अररिया जिले में 25 हजार 537, मधुबनी में 23 हजार 224, बेगूसराय में 22 हजार 317, पश्चिम चंपारण में 17 हजार 768, सुपौल जिले में 16 हजार 419, मुजफ्फरपुर जिले में 16 हजार 239, पटना में 14 हजार 854 आवास अधूरे हैं।

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