नीतीश और तेजस्वी में डिजिटल भिड़ंत, राजद ने की नई तैयारी, इस मुद्दे पर हल्ला बोल

पटना
अभी पिछले दिनों जदयू ने अपना ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद से जदयू जहां वर्चुअल रैलियां कराएगी वहीं नीतीश सरकार के कार्यों का प्रचार भी किया जाएगा। अब जदयू के इस ऑनलाइन तैयारी का मुकाबला करने के लिए पूर्व डिप्टी सीएम और राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी अपन दांव ऑनलाइन ही खेला है। तेजस्वी ने नीतीश सरकार को घेरते हुए एक वेबपोर्टल लॉन्च किया है। ये वेबपोर्टल भी एक खास उद्देश्य के लिए बनाया गया है। शनिवार को तेजस्वी यादव एक बार फिर आक्रामक रूप में दिखे हैं।

तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा है कि बिहार में सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी का है। तेजस्वी ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाया है कि उनकी सरकार इस मामले को लेकर कुछ नहीं कर रही है। तेजस्वी ने बकायदा आंकड़ा देते हुए बताया है कि बिहार में बेरोजगारी की दर लगभग 46 फीसदी है। पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा है कि लॉकडाउन ने इस स्थिति को और भी भयावह बना दिया है।

इसी को देखते हुए तेजस्वी यादव ने बेरोजगारी हटाने का लक्ष्य बनाने एक नया आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने ऐलान किया कि उनकी पार्टी एक नया वेब पोर्टल http://berojgarihatao.co.in शुरू कर रही है। इसके अलावा एक टोल फ्री नंबर 9334302020 भी जारी किया गया है। तेजस्वी ने बताया है कि सभी नौजवान इसपर पंजीकरण करा सकते हैं। तेजस्वी ने वादा किया है कि चुनाव बाद उनकी सरकार बनने के बाद उनके पास ये डेटाबेस होगा। इसी आधार पर लोगों को रोजगार देने के लिए मेगा ड्राइव चलाई जाएगी।

आपको बता दें कि लॉकडाउन के बाद नौकरियां जाने से बिहार के मजदूरों का काफी नुकसान हुआ है। देशके अलग-अलग राज्यों में जीविका कमा रहे इन मजदूरों को वापस लौटना पड़ा है। ऐसे में इस बार बिहार के विधानसभा चुनावों में रोजगार का मुद्दा काफी असरदार भी साबित हो सकता है।

एससी-एसटी को लेकर भी नीतीश पर बरसे तेजस्वी

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि चुनाव नजदीक आने की वजह से नीतीश सरकार एससी-एसटी और ओबीसी या सामान्य कैटिगरी को लेकर भेदभाव कर रही है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि नीतीश सरकार ने जॉब को लेकर जो घोषणा की है वो एक तरह से एससी-एसटी पर अत्याचार को बढ़ावा देने वाला ही है।

तेजस्वी ने कहा है कि बिहार में अलग-अलग विभागों में 4.5 लाख सरकारी नौकरियों के पद खाली हैं। अगर जनता उन्हें चुनती है तो महागठंबन की सरकार न केवल इन खाली पदों को भरेगी बल्कि जनसंख्या के हिसाब से नई नौकरियों का सृजन भी करेगी।

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