भाजपा ने बिहार चुनाव में 1 करोड़ खर्च कर बनाया एक MLA, 72 करोड़ में 74 विस सीटें जीतीं

New Delhi : एक करोड़ रुपए खर्च कर कोई पार्टी किसी कार्यकर्ता को विधायक क्यों बनायेगी? लोगों की सेवा करने के लिये? 5 साल तक लोगों की सेवा करने के लिये? बात हजम नहीं होती लेकिन पॅलटिक्स में न तो अब इसका विचार रह गया है और न ही आम लोग इसको कुछ खास तवज्जो देते हैं। लगभग सबने यह मान लिया है या कहा जा सकता है कि सर्वमान्य तथ्य है कि मुखिया से लेकर सांसद तक राजनेता खूब पैसा खर्च करके चुनाव जीतते हैं और फिर सरकारी योजनाओं से खर्च का मेंटेनेन्स हो जाता है। हम कभी इस पर विचार करते ही नहीं कि पैसा आता कहां से है और किसका होता है। इसे रोका कैसे जा सकता है इस पर तो देश में कभी चर्चा हुई ही नहीं। चुनाव आयोग ने जरूर बेतहाशा खर्च पर अंकुश लगाने के लिये खर्च की अधिकतम सीमा तय कर दी।

बहरहाल बिहार में पिछले साल विधानसभा चुनाव के खर्चों का हिसाब किताब राजनीतिक पार्टियों ने दे दिया है। भाजपा ने चुनाव में करीब 71.73 करोड़ रुपये खर्च किये और 74 विधानसभा की सीटे जीतीं। इन खर्चों के हिसाब किताब से यह बात जाहिर होती है कि प्रदेश के सभी भाजपा प्रत्याशी को पार्टी की ओर से चुनाव लड़ने के लिये करीब 15-15 लाख रुपये की फंडिंग की गई। इसके अलावा स्टार प्रचारकों के आने जाने पर सर्वाधिक करीब 24 करोड़ रुपये खर्च किया गया। पार्टी के द्वारा दिये गये लेखाजोखा से यह भी साबित हो जाता है कि चुनाव से पहले पार्टी के पास करीब 2367 करोड़ रुपये थे जो घटकर चुनाव के बाद 2279 करोड़ रुपये हो गया। सेंट्रल यूनिट ने जेपी नड‍्डा, योगी आदित्यनाथ जैसे स्टार प्रचारकों का खर्च उठाया जबकि स्टेट यूनिट ने करीब डेढ़ लाख रुपये स्टार प्रचारकों के ट्रैवल पर खर्च किया गया। सबसे अधिक पैसा हेलीकॉप्टर पर किया गया।

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