चिराग पासवान। Image Source : Twitter

बंगला से दोनों बेदखल : चिराग अब लोजपा (रामविलास) के मालिक, पारस को राष्ट्रीय लोजपा, सिंबल भी अलग

New Delhi : पूर्व केंद्रीय मंत्री और दलित राजनीति के चेहरे रामविलास पासवान के गये एक साल भी नहीं हुये थे कि उनकी 22 साल पुरानी के दो टुकड़े हो गये। चुनाव आयोग ने उनके बेटे चिराग पासवान के गुट वाली पार्टी को लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नाम की स्वीकृति दे दी है। जबकि पांच सांसदों के साथ लोकजनशक्ति पार्टी का हरण करनेवाले केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस के गुट को राष्ट्रीय लोकजशक्ति पार्टी के रूप में मान्यता दी गई है। जून महीने से दोनों में पार्टी की विरासत को लेकर जंग हो रही थी। उस समय पशुपति पारस ने पांच सांसदों के साथ मिलकर चिराग पासवान को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटा दिया था और पार्लियामेंट में संसदीय दल का नया नेता पशुपति पारस को बना दिया था। लोकसभा अध्यक्ष ने तत्काल ही इसकी मान्यता भी दे दी थी।

इसके बाद चिराग पासवान अपने पिता की विरासत हासिल करने की जंग लड़ रहे थे। उन्होंने पार्टी कार्यकारिणी के जरिये सभी बागियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाते हुये कोर्ट में अपनी फरियाद लेकर चले गये। इस बीच चिराग पासवान और पशुपति पारस ने अपना अपना पक्ष चुनाव आयोग के समक्ष भी रखा। बिहार में उप चुनाव को देखते हुये पार्टी की विरासत पर कब्जे की जंग तेज हुई तो पिछले सप्ताह चुनाव आयोग ने लोक जनशक्ति पार्टी के नाम और पार्टी सिंबल के इस्तेमाल पर दोनों पक्षों के लिये रोक लगा दी।
अब चुनाव आयोग ने लोक जनशक्ति पार्टी के दो गुटों को अलग-अलग दलों के रूप में मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही अब पुराने नाम और चुनाव चिन्ह को भी खत्म कर दिया गया है। अब चिराग पासवान के नेतृत्व वाले धड़े का नाम लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) होगा। इस पार्टी को हेलीकॉप्टर चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। इसके अलावा उनके चाचा और रामविलास पासवान के सगे भाई पशुपति कुमार पारस की पार्टी का नाम राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी होगा। इस पार्टी को सिलाई मशीन का चुनाव चिन्ह दिया गया है।

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