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सहनी की नौटंकी पर ब्रेक : फूलन की प्रतिमाएं जब्त की योगी सरकार ने, चेतावनी- माहौल मत बिगाड़ो

New Delhi : नीतीश कुमार के मंत्री और पैसे के दम पर “सन ऑफ मल्लाह” की ब्रांडिंग कर चुके मुकेश सहनी को योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बता दिया है कि शासन कैसे काम करता है। सहनी ने उत्तर प्रदेश के 18 स्थानों पर फूलन देवी की प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की थी। इसके लिये प्रतिमाएं भेज भी दी गईं। ऐसी प्रतिमाएं अमूमन फिल्मों के सेट पर लगाये जाते हैं। चूंकि मुकेश सहनी मुम्बई में यही काम करते रहे हैं और उनका मुख्य धंधा फिल्म सेट तैयार करना है सो उन्होंने अपनी राजनीति में थोड़ा-थोड़ा फिल्मी पुट डाल रखा है। उनको लगा कि वे निषाद जाति से आनेवाली फूलन देवी की मूर्तियां यूपी के अलग-अलग शहरों में लगाकर यूपी में भी निषाद की राजनीति शुरू कर देंगे और 2022 के चुनाव में अपना परचम लहरायेंगे। लेकिन उनके मनसूबों पर योगी आदित्यनाथ ने पानी फेर दिया है।

 

चले थे 25 जुलाई को पुण्यतिथि पर यूपी के शहरों में फूलन देवी के स्टैच्यू लगाने और अब सारे स्टैच्यू प्रशासन के कब्जे में है। शुरुआत हुई बनारस से। बनारस के अफसरों ने कहा कि इससे जातीय तनाव फैलेगा। दंगा हो सकता है। सामाजिक सौहार्द बिगड़ेगा। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के मुकेश सहनी ने अपने पटना क सरकारी आवास पर फूलन देवी की दो दर्जन से अधिक मूर्तियां बनवाई थीं। तैयार होने के बाद इन मूर्तियों को ट्रकों से उत्तर प्रदेश भेजा गया। सहनी के मुताबिक, ये मूर्तियां वाराणसी, लखनऊ, बलिया, संत कबीरनगर, बांदा, अयोध्या, सुल्तानपुर, गोरखपुर, महाराजगंज, औरैया, प्रयागराज, उन्नाव, मेरठ, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, मुजफ्फरनगर, फिरोजाबाद और जौनपुर में स्थापित की जानी हैं।
पार्टी ने इस कार्रवाई को गलत बताया है। पार्टी का कहना है कि जिन 18 जिलों में फूलन देवी की मूर्ति लगाई जानी है। वहां पार्टी ने इसे अपनी जमीन पर इन्हें लगाने का फैसला लिया है। ऐसे में प्रशासन की तरफ से की गई ये रोक द्वेषपूर्ण कार्रवाई है। हालांकि इस मामले पर मंत्री मुकेश सहनी ने खुद सामने आकर कोई बात नहीं कही है।
यूपी में निषाद, मल्लाह और कश्यप वोट करीब चार फीसदी है। निषाद समाज से आने वाली फूलन देवी के बहाने निषाद वोटों को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है। इसी रणनीति के तहत सहनी ने अपने मुख्य कार्यक्रम के लिये वाराणसी का चुनाव किया है।
बता दें कि 20 साल पहले फूलन देवी की हत्या कर दी गई थी। फूलन देवी का जन्म 10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के शेखपुरा पूर्वा में हुआ था। गांव के कुछ विशेष वर्ग के लोगों ने प्रताड़ित किया। इसके बाद फूलन देवी डकैतों के दल में शामिल हो गई थीं। अपने ऊपर हुये अत्याचारों का बदला लेते फूलन देवी ने राजपुत समुदाय के 22 लोगों की जान ले ली थी। 1983 में इंदिरा गांधी की तत्‍कालीन सरकार की पहल पर फूलन देवी ने मध्यप्रदेश के भिंड में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समक्ष आत्‍मसमर्पण कर दिया था।

बिना मुकदमा चलाये 11 साल तक जेल में रहने के बाद फूलन देवी को 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने रिहा कर दिया था। फूलन ने अपनी रिहाई के बाद बौद्ध धर्म अपना लिया था। 1996 में फूलन देवी ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर सीट से (लोकसभा) चुनाव जीता और वह संसद तक पहुंचीं। 25 जुलाई 2001 को ठाकुर शमशेर सिंह राणा ने दिल्ली में उनके आवास पर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी।

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