दिल्ली पुलिस की चार्जशीट- लालकिला को विरोध का ठिकाना बनाने की थी साजिश, पैसे मिले थे विरोध के

New Delhi : 26 जनवरी को किसान लाल किला पर कब्जा करना चाहते थे और उसे ही किसान आंदोलन का प्रतीक चिहन के रूप में स्थापित करना चाहते थे। इसके लिए पूरे षडयंत्र की व्यूह रचना की गई थी लेकिन दिल्ली पुलिस ने मौके पर तत्परता दिखाते हुए ऐसा होने नहीं दिया। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। दिल्ली पुलिस ने अपने आरोप पत्र में कहा है- 26 जनवरी को लाल किले पर हिंसक भीड़ केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के लिए इसे नया विरोध स्थल बनाने के लिए लाल किले पर कब्जा करना चाहती थी। 3,232 पन्नों की चार्जशीट में पुलिस ने दिसंबर 2020 में हरियाणा और पंजाब में ट्रैक्टरों की खरीद के आंकड़ों का हवाला दिया और इसकी तुलना पिछले साल की इसी अवधि से की।

गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर हुई हिंसा के करीब चार महीने बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में अभिनेता-कार्यकर्ता दीप सिद्धू और 15 अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। 26 जनवरी को, तीन कृषि कानूनों के खिलाफ ट्रैक्टर रैली के दौरान प्रदर्शनकारी किसान पुलिस से भिड़ गए और लाल किले में घुस गए, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। मामले की जांच करने वाली दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 17 मई को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट साहिल मोंगा के समक्ष रिपोर्ट दाखिल की और सिद्धू सहित 16 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की।
चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने बताया है- लाल किले में घुसी भीड़ का मकसद यह था कि किले को अपने मोर्चे और धरने का नया ठिकाना बनाकर वहीं से आंदोलन को आगे बढ़ाया जाये। लाल किले पर निशान साहिब और किसानों का झंडा फहराने के लिए आरोपियों ने जानबूझकर गणतंत्र दिवस का दिन चुना ताकि राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकार को शर्मिंदगी झेलनी पड़े।
पुलिस का कहना है – साजिश को अंजाम देने के लिए पैसे का भी इस्तेमाल हुआ था। एक आरोपी इकबाल सिंह से पुलिस की पूछताछ में यह खुलासा हुआ है। इकबाल सिंह ने बताया कि सिख फॉर जस्टिस ग्रुप ने उसे लाल किले पर निशान साहिब का झंडा लगाने में कामयाब होने पर कैश देने का वादा किया था।

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