चिराग पासवान। Image Source : Twitter

चिराग ने दिल्ली हाईकोर्ट में केस कर लोकसभा स्पीकर के फैसले को चुनौती दी, पारस को मंत्री बनाने का तीखा विरोध

New Delhi : लोक जन शक्ति पार्टी के नेता और रामविलास पासवान के उत्तराधिकारी चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में अपने चाचा को शामिल किये जाने पर कड़ा विरोध जताते हुये बुधवार को फिर दोहराया कि पशुपति कुमार पारस अब पार्टी के सदस्य नहीं हैं। चिराग ने कहा- प्रधानमंत्री के किसी को भी अपनी टीम में शामिल करने के अधिकार का सम्मान किया जाता है। लेकिन जहां तक ​​लोजपा का सवाल है, पारस पार्टी के सदस्य नहीं हैं। पार्टी को तोड़ने की कोशिश करने जैसी उनकी गतिविधियों को ध्यान में रखते हुये उन्हें पहले ही निकाला जा चुका है। वे अलग हुये समूह का हिस्सा हैं, लोजपा का इससे कोई लेना-देना नहीं है। चिराग पासवान ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर लोकसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती भी दी है जिसमें पशुपति कुमार पारस की अगुवाई वाले गुट को सदन में एलजेपी के तौर पर मान्यता दी गई है।

 

चिराग पासवान ने ट्वीट किया है- लोजपा ने पारस को लोजपा के संसदीय दल के नेता के रूप में मान्यता देने के लोकसभा अध्यक्ष के शुरुआती फैसले के खिलाफ आज दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। बता दें कि पिछले महीने एक पार्टी तख्तापलट में चिराग पासवान को पारस सहित कुछ बागी सांसदों ने लोजपा अध्यक्ष पद से हटा दिया था। उन्होंने जवाबी कार्रवाई करते हुये अपने चाचा और चार अन्य सांसदों को निष्कासित कर दिया। चिराग ने लोक जनशक्ति पार्टी पर कब्जे को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी है।
सांसद चिराग पासवान की ओर से दाखिल याचिका पर उच्च न्यायालय में 9 जुलाई को सुनवाई होने की संभावना है। याचिका में कहा गया है कि पार्टी विरोधी गतिविधि और शीर्ष नेतृत्व को धोखा देने के कारण लोक जनशक्ति पार्टी ने पहले ही पशुपति कुमार पारस को पार्टी से निकाल दिया था। सांसद पारस लोजपा के सदस्य नहीं हैं। याचिका में यह भी कहा गया है लोजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कुल 75 सदस्य हैं और इनमें से 66 सदस्य हमारे साथ हैं और सभी ने हलफनामा दिया है। सांसद चिराग ने कहा है कि उनके चाचा पशुपति कुमार पारस के पास कोई ठोस आधार नहीं है और हमारे दल के सदस्य नहीं है।

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