चिराग-लोजपा ने लिख दी चतुराई वाली चिट्ठी, भाजपा तो होगी मगन, क्या नीतीश संग हो गया खेल?

पटना
बिहार की राजनीति में रुचि रखने वालों को आज चिराग पासवान और लोजपा के करतब को करीब से देखने की जरूरत है। असल में रविवार को चिराग पासवान ने बड़ा ऐलान कर दिया है। लोजपा ने कहा है कि वह बिहार में जदयू के साथ चुनाव नहीं लड़ सकती। लेकिन लोजपा ने भाजपा के साथ अपने संबंध खत्म नहीं किए हैं। इस मौके पर लोजपा के प्रधान महासचिव अब्दुल खालिक के हस्ताक्षर वाली एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर सामने आई है। वरिष्ठ पत्रकारों ने इस चिट्ठी को शेयर किया है। हम इस राजनीतिक विश्लेष को आगे बढ़ाएं और आपको विस्तार से इसके बारे में बताएं उससे पहले आप चिट्ठी का अहम हिस्सा पढ़ लीजिए।

मोदी से वैर नहीं पर नीतीश तेरी खैर नहीं वाला स्टाइल है ये

अगर आपको राजस्थान का चुनाव याद हो तो एक नारा उछला था। नारा था कि मोदी से वैर नहीं पर वसुंधरा की खैर नहीं। नतीजा .ये हुआ कि वसुंधरा राजे कांग्रेस के गहलोत से चुनाव हार गईं। चिराग के नेतृत्व में एलजेपी से कुछ ऐसी ही आवाज सामने आई है। आइए पहले आपको एलजेपी की चिट्ठी का अहम हिस्सा पढ़ाते हैं।

नीतीश से वैचारिक मतभेद, भाजपा से कोई कटुता नहीं

लोजपा की चिट्ठी में लिखा है, ‘राजकीय स्तर पर व विधानसभा चुनाव में गठबंधन में मौजूद जनता दल (यूनाइटेड) से वैचारिक मतभेदों के कारण बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी ने गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। कई सीटों पर जेडीयू के साथ वैचारिक लड़ाई हो सकती है ताकि उन सीटों पर जनता निर्णय कर सके कौन सा प्रत्याशी बिहार के हित में बेहतर है। लोक जनशक्ति पार्टी बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट विजन डॉक्युमेंट लागू करना चाहती थी। जिसपर समय रहते सहमति नहीं बन पाई। लोकसभा में हमारा भाजपा के साथ एक मजबूत गठबंधन है, बिहार में भी हम चाहते थे कि वैसे ही चुनाव लड़ें। लोजपा और भाजपा में कोई कटुता नहीं है। चुनाव परिणामों के उपरांत लोक जनशक्ति पार्टी के तमाम जीते हुए विधायक आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकास मार्ग के साथ रहकर भाजपा-लोजपा सरकार बनाएंगे। लोजपा का मानना है कि केंद्र की तर्ज पर बिहार में भी भाजपा के नेतृत्व में सरकार बने। लोजपा का हर विधायक भाजपा के नेतृत्व में बिहार को फर्स्ट बनाने का काम करेंगे।’

तो समझ में आया आपको खेल?

बिहार की जनता की राजनीतिक मेधा को पूरा देश मानता है। तो क्या आप लोगों को इस चिट्ठी को पढ़कर कुछ समझ में आया? क्या आपको लग रहा है कि नीतीश के साथ खेल की कोशिश हो रही है? असल में सोशल मीडिया पर इस चिट्ठी को लेकर अलग-अलग कहानियां चल रही हैं। कोई कह रहा है कि ये भाजपा का गेम प्लान है। अगर नीतीश की सीटें कम हुईं तो भाजपा लोजपा के साथ मिलकर सरकार बना सकती है। ऐसी थिअरी इसलिए भी सामने आ रही हैं क्योंकि भाजपा अभी इस चिट्ठी के जवाब में खामोश है।

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