रामविलास पासवान के जयंती के मौके पर आशीर्वाद यात्रा निकालने बिहार पहुंचे तो जगह जगह खूब स्वागत हुआ चिराग पासवान का। Image Source : Agencies

चिराग व्यापक पैमाने पर मनायेंगे अपने पिता की पहली बरसी, तेजस्वी से भी मुलाकात होगी

Patna : लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के नेता चिराग पासवान अपने पिता रामविलास पासवान की पहली बरसी पर 12 सितंबर को पटना में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं को आमंत्रित किया है। चिराग ने मंगलवार को यह जानकारी दी। आज इसी सिलसिले में वे राजद नेता और बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात करेंगे। हालांकि वे तेजस्वी को इसमें शामिल होने के लिये ही आमंत्रित करेंगे लेकिन ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि यह आनेवाले समय में बिहार की राजनीतिक धारा को भी तय करेगी।

यह आयोजन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब चिराग पासवान अपने चाचा और केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस के साथ अपने पिता की विरासत को लेकर लड़ रहे हैं। कार्यक्रम में आमंत्रित करने के लिये चिराग पासवान अंकल पारस के घर नई दिल्ली भी गये थे। चिराग ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को भी आमंत्रित किया गया है। आपको बता दें कि नीतीश कुमार और चिराग पासवान के बीच गहरे मतभेद हैं।
सूत्रों ने बताया कि पशुपति कुमार पारस भी 8 अक्टूबर को रामविलास पासवान की जयंती पर एक कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं। रामविलास पासवान का पिछले साल 8 अक्टूबर को निधन हो गया था। पारस के शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं को आमंत्रित करने की भी उम्मीद है। जमुई सांसद चिराग 12 सितंबर को पारंपरिक कैलेंडर के आधार पर जयंती कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। यानी 12 सितंबर को रामविलास पासवान की पहली बरसी होगी।
लोजपा के छह सांसदों में से पांच ने पारस से हाथ मिला लिया है। इस बीच भाजपा ने पार्टी पर चिराग पासवान के दावे की अनदेखी करते हुये पारस को मोदी सरकार में मंत्री पद दिया है। वहीं लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने चिराग पासवान से संपर्क किया है। चिराग ने भाजपा द्वारा उनके साथ किये गये व्यवहार पर नाराजगी व्यक्त की है, लेकिन अभी तक वह भविष्य के राजनीतिक पाठ्यक्रम पर चुप हैं।
चिराग ने कहा कि जिस स्थान पर उनके दिवंगत पिता रामविलास पासवान तीन दशक से अधिक समय तक रहे, वहां उनकी प्रतिमा उनके प्रति पार्टी के प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने इन अटकलों को खारिज कर दिया कि यह इस सरकारी आवास को अपने नियंत्रण में रखने का उनका प्रयास था। चिराग ने कहा कि एक सांसद के तौर पर वह ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जिसे अतिक्रमण या किसी भी तरह से कानून का उल्लंघन माना जा सके।

 

उन्होंने कहा कि सरकारी नियम किसी भी सरकारी आवास को संग्रहालय या स्मारक में बदलने की अनुमति नहीं देते हैं। अभी सरकार ने मुझे यहां रहने की इजाजत दी है। प्रतिमा दिवंगत नेता के लिये पार्टी के प्रेम का प्रतीक है और जहां भी वैकल्पिक व्यवस्था की जायेगी, वहां इसे स्थानांतरित कर दिया जाएगा। पार्टी की योजना देश के हर जिले में उनके पिता की प्रतिमाएं लगाने की है।

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