प्रेस कान्फ्रेन्स करते चिराग पासवान। Image Source : Agencies

चिराग का पारस पर तंज- सत्ता के लोभियों ने वंचित समाज के आंदोलन की आवाज का गला घोंट दिया

Patna : लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस पर परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुये, वरिष्ठ नेता चिराग पासवान ने रविवार को कहा कि पार्टी के कुछ नेताओं के “सत्ता के लालच” ने समाज में वंचितों के उत्थान के लिये उनके पिता रामविलास पासवान के आंदोलन को कमजोर कर दिया है। यह टिप्पणी चुनाव आयोग (ईसीआई) के शनिवार के फैसले के बाद आई है। चुनाव आयोग ने चिराग पवन और पशुपति कुमार पारस के गुटों में खींचतान के बीच लोक जनशक्ति पार्टी के चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। पासवान ने ट्वीट किया- वंचित समाज की आवाज़ को देशभर में पिताजी ने आंदोलन बनाया। उस आंदोलन की मुखर आवाज़ बनी लोजपा। लेकिन सत्ता के लोभ में फंस चुके कुछ सहयात्रियों ने ही पिताजी के आंदोलन की आवाज़ को कमज़ोर कर दिया। आयोग का ये अंतरिम फैसला है। हमारे तर्कों को जगह मिली है। लोजपा की हुंकार कायम रहेगी।

कल चुनाव आयोग ने एक बयान जारी कर कहा कि पासवान या चिराग के दो समूहों में से किसी को भी लोजपा के प्रतीक का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जायेगी। जब तक कि इस पर अंतिम फैसला न हो जाये। आयोग ने आगे दोनों समूहों को अंतरिम उपाय के रूप में, अपने समूहों के नाम और “चिह्न जो संबंधित समूहों द्वारा उम्मीदवारों को आवंटित किये जा सकते हैं, को 4 अक्टूबर तक चुनने का निर्देश दिया।
लोजपा बिहार में एक मान्यता प्राप्त पार्टी है जिसका चुनाव चिन्ह ‘बंगला’ है। चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस दोनों ने इससे पहले जून में चुनाव आयोग को पार्टी के चुनाव चिह्न पर अधिकार के बारे में लिखा था। 13 जून को, लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान के छोटे भाई पारस को चिराग पासवान के स्थान पर लोकसभा में लोजपा के नेता के रूप में मान्यता दी गई थी, जब पार्टी के छह सांसदों में से पांच ने उनके समर्थन में एक पत्र सौंपा था।
स्पीकर ने पारस को निचले सदन में लोजपा के फ्लोर लीडर के रूप में स्वीकार किया। लोजपा का गठन 2000 में पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने किया था। बिहार की राजनीति के एक दिग्गज नेता पासवान का अक्टूबर 2020 में निधन हो गया।

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