नीतीश कुमार के नए ऐलान पर मचा सियासी घमासान, जाति को लेकर भिड़ी पार्टियां

पटना

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक फैसले से महागठबंधन अब दो खेमों में बंट गया है। दरअसल सीएम नीतीश ने अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत सतर्कता मीटिंग में अधिकारियों को राज्य में किसी भी अनुसूचित जाति-जनजाति की हत्या हो जाने पर उसके परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिये जाने को लेकर प्रावधान बनाने का निर्देश दिया था। जिसके बाद से ही सूबे में जाति को लेकर सियासी घमासान मच गया है।

नीतीश के इस फैसले ने महागठबंधन के दलों को भी दो खेमों में बांट दिया है। जहां एक तरफ आरजेडी और आरएलएसपी इस फैसले को महज पब्लिसिटी स्टंट बता रही है वहीं दूसरी तरफ विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने इस फैसले का स्वागत किया है। बता दें कि एक तरफ आरजेडी और RLSP ने कहा है कि नीतीश कुमार चुनाव नजदीक होने के कारण एससी-एसटी को जुमला दे रहे हैं तो वहीं वीआईपी पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने नीतीश के इस फैसले का स्वागत करते हुए मांग की है कि इसके तहत एससी-एसटी समेत अत्यंत पिछड़ी जातियों को भी शामिल किया जाये ताकि उनके भी इसका लाभ मिल सके।

नीतीश कुमार द्वारा राज्य में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दलित समाज के लिए इस तरह के प्रावधान बनाए जाने के निर्देश को राजनैतिक विश्लेषक विधानसभा चुनाव में दलित वोटर्स को साधने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।

राज्य की सत्ता दिलाने में दलित वर्ग निभाता है निर्णायक भूमिका

गौरतलब है कि बिहार में जातीय राजनीति के आधार पर चुनाव लड़े जाते हैं। ऐसे में इस वक़्त सीएम नीतीश का यह फैसला ज़रूर उनके लिए फायदे का साबित हो सकता है। आपको बता दें कि 2011 की जनगड़ना के हिसाब से देखें तो राज्य में 16 फीसदी आबादी दलित वर्ग से आती है। ऐसे में दलित वर्ग किसी भी पार्टी को राज्य की सत्ता दिलाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *