प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बंगाल के गवर्नर और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की फाइल फोटो

CM बोलीं- यूपी से बंगाल आ रहे शव, कोरोना फैला रहे, MLA ने गवर्नर को कहा- काला कुत्ता भौंकता है

New Delhi : पश्चिम बंगाल की राजनीति जूतम पैजार से बस दो कदम दूर रह गई है। भारतीय जनता पार्टी के आरोपों से तिलमिलाई तृणमूल ने गवर्नर और भाजपा पर एकसाथ हमला बोल दिया है। तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा ने सोमवार को राज्य के गवर्नर जगदीप धनखड़ की तुलना कुत्ते से कर दी। मदन मित्रा ने विवादित बयान देते हुये कहा- जहां भी जाते हैं, मैं सुनता हूं कि धनखड़ को काला झंडा दिखाया गया। जब हम छोटे थे तो लोग कहते थे कि काला कुत्ता भौंकता है। मुझे समझ में नहीं आता कि आखिर जनता उन्हें क्या समझती है। वह जहां भी दौड़ते हैं, यदि उसे फिल्म के सीन में दिखाया जाये तो काले कुत्ते की तरह दिखाया जायेगा। मैं जनता से अनुरोध करूंगा कि उन्हें काले झंडे की बजाय गोल्डन, लाल या कुछ और रंग के झंडे दिखाये जायें। आखिर हर टाइम लोग उन्हें कुत्ते की तरह काला झंडा ही क्यों दिखाती है। इसलिये क्योंकि हर समय हमारे दिमाग में आता है कि काला कुत्ता भौंकता है।

 

इधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अब यूपी का जिक्र कर भाजपा पर निशाना साधा है। ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा- गंगा नदी में यूपी से शव बहकर आ रहे हैं और इनके कोरोना संक्रमित होने का खतरा है। ममता बनर्जी ने कहा- नदी में बहते हुए यूपी से बंगाल तक शव आ रहे हैं। इनके कोरोना संक्रमित होने का भी खतरा है। हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं और उनका अंतिम संस्कार कर रहे हैं। ममता बनर्जी अकसर यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती रही हैं।
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में एक पत्रकार को जान से मार दिये जाने के मामले में भी उन्होंने यूपी की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया था। इससे पहले चुनाव के दौरान भी उन्होंने कहा था कि यूपी के लोग बंगाल में आकर माहौल को खराब कर रहे हैं। वैसे पश्चिम बंगाल के लिये सोमवार का दिन बड़े घटनाक्रमों का रहा है। एक तरफ केंद्र सरकार ने ममता बनर्जी के सलाहकार बने राज्य के पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय के खिलाफ एक्शन का फैसला लिया है और उनसे लिखित में सफाई मांगी है। वहीं दूसरी तरफ कलकत्ता हाई कोर्ट ने चुनाव के बाद की घटनाओं की जांच के लिये मानवाधिकार आयोग को समिति के गठन का आदेश देने पर रोक से इनकार कर दिया है। यही नहीं आयोग की ओर से 7 सदस्यों की एक कमिटी गठित भी कर दी गई है।

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