नीतीश की डेट के साथ कांग्रेस ने भिड़ा दी अपनी भी डेट, एक ही दिनों दोनों का शंखनाद

पटना
बिहार विधानसभा चुनावों के लिए समर तैयार है। एक तरफ सत्ताधारी पक्ष यानी एनडीए के घटक दल लगातार अपनी तैयारियों को अंजाम दे रहे हैं तो दूसरी तरफ महागठबंधन भी इस बार सत्ता बदलने को आतुर दिख रहा है। यही वजह है कि कोरोना की चुनौतियों के बीच भी चुनावी गतिविधियों पर लगाम नहीं लगी है। हां ये जरूर हुआ है कि राजनीतिक दल वर्चुअल कार्यक्रमों पर ध्यान देने लगे हैं। अगले हफ्ते ऐसे ही दो कार्यक्रम होने हैं। एक सीएम नीतीश कुमार करेंगे और दूसरा कांग्रेस। लेकिन कांग्रेस ने इस बार जदयू के कार्यक्रम के साथ ही अपने कार्यक्रम की भी डेट भिड़ा दी है।

असल में जनता दल यूनाइटेड की वर्चुअल रैली 7 सितंबर को होनी थी। वहीं कांग्रेस ने बिहार क्रांति महासम्मेलन 1 सितंबर को होना था। लेकिन पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन की वजह से इसे भी 7 सितंबर को कर दिया गया है। एक तरह से देखा जाए तो ये दोनों दलों का चुनावी बिगुल है जो अब एक ही दिन फूंका जाएगा। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के वर्चुअल कार्यक्रम में दिल्ली से भी कुछ नेता शामिल हो सकते हैं। हालांकि इन नेताओं में राहुल गांधी का नाम नहीं है। बिहार कांग्रेस की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी बिहार के लिए अलग से कार्यक्रम करेंगे।

जदयू ने लॉन्च किया है डिजिटल प्लेटफॉर्म
आपको बता दें कि इस बार बिहार में डिजिटल कैंपेन के लिए जदयू ने उम्दा तैयारियां की हैं। इसी क्रम में पार्टी ने एक मल्टीडाइमेंशनल डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इसी के जरिए तमाम रैलियां होंगी लेकिन नीतीश कुमार के 7 सितंबर के ‘निश्चय संवाद’ को लेकर खास तैयारियां की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि जदयू के इस प्लेटफॉर्म से 10 लाख लोगों को लाइव जोड़ा जा सका है।

जदयू ने इस प्लेटफॉम की मदद से बिहार सरकार की सकारात्मक छवियों को पेश करने की योजना बनाई है। जदयू का यह ऐप बेस़्ड प्लेटफॉर्म पीएम नरेंद्र मोदी के नमो ऐप जैसा है। जैसे नमो ऐप से पीएम नरेंद्र मोदी की ब्रांडिंग की जा रही है वैसे ही इस ऐप से नीतीश सरकार की ब्रांडिंग होगी।

अभी इमेज मेकओवर की जरूरत भी

नीतीश सरकार को इस समय कई फ्रंट पर लड़ाई लड़ना पड़ रहा है। बिहार कोरोना और बाढ़ दोनों से त्रस्त है। महामारी की वजह से हुई आर्थिक बंदी ने बिहार के मजदूरों को कई राज्यों में बेरोजगार बना दिया और उन्हें घरवापसी को मजबूर होना पड़ा। ऐसे में नीतीश सरकार के सामने चुनौती ये है कि सूबे में ही रोजगार का सृजन हो। ऐसी सिचुएशन में सरकार को इमेज मेकओवर करने की भी जरूरत महसूस हो रही है। ऐसे में ये वर्चुअल प्लेटफॉर्म नीतीश सरकार और जदयू के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

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