पटना के स्लम एरिया में लॉकडाउन के दौरान सरकारी सर्वे ताकि मरीजों की पहचान हो सके। प्रतीकात्मक तस्वीर। Image Source : Tweeted by @kumravi

वीआईपी क्षेत्र में खूब फैला कोरोना लेकिन स्लम एरिया से एक भी केस नहीं, सफाईकर्मी भी अछूते

Patna : कोरानों की दूसरी लहर ने संपूर्ण पटना जिले को गिरफ्त में लिया था। शहर का कोई वार्ड अछूता नहीं रहा, कोई पंचायत ऐसी नहीं रही जहां महामारी ने दस्तक नहीं दी। लेकिन कोरोना से झुग्गी बस्तियां, स्लम एरिया और मोकामा टाल जैसे इलाके बिलकुल अछूते रहे। शहर से जो बसावट जितनी सुदूर थी, वहां महामारी का प्रभाव उतना ही कम था। हालांकि ऐसे इलाकों में टेस्ट भी कम ही हुये। कोराना से 3-4 को छोड़कर नगर निगम के 7300 सफाईकर्मी भी अछूते रहे। अधिकांश सफाईकर्मी स्लम में ही रहते हैं। हालांकि सभी सफाईकर्मियों को दूसरी लहर के पूर्व ही वैक्सीन भी लगाई जा चुकी थी। यह निष्कर्ष आद्री की गुरुवार को जारी रिपोर्ट- लर्निंग फ्रॉम कोविड-19 केसेज ,ए सोशियोलॉजिकल स्टडी ऑफ पटना डिस्ट्रिक्ट का है।

इस रिपोर्ट को लोकायुक्त के पूर्व सदस्य केसी साहा ने तैयार किया है। स्टडी में यह भी सामने आया है कि ग्रामीण क्षेत्र में बाजार से सटे इलाकों में ज्यादा कोविड के ज्यादा केसे रिपोर्ट किये गये और महामारी का केंद्र पटना शहर ही रहा। इस बात के पूर्ण साक्ष्य हैं कि महामारी शहर से ही गांव की ओर गई। और महिलाओं से डेढ़ गुना ज्यादा पुरुष इसकी गिरफ्त में आये। इसमें 40.6% लोग 21-40 आयु वर्ग के थे। रिपोर्ट के अनुसार, संक्रमण की दूसरी लहर में प्रवासी मजदूर ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं रहे।
कोरोना की पहली और दूसरी लहर की ट्रेंड एनालिस के आधार पर स्टडी कहती है कि अगर कड़े कदम नहीं उठाये गये तो अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में तीसरी लहर आ सकती है। यह महीने त्योहारों के हैं। दूसरी लहर में 90% मरीज होम आइसोलेशन में ही अपने फैमिली डॉक्टर की परामर्श से ठीक हुये।
साहा की स्टडी कहती है कि जिले की अधिकांश पंचायतों में अप्रैल-मई के बीच 20-25 लोगों ने अपनी जान गंवाई लेकिन सभी कोरोना से हुईं, यह प्रमाणित नहीं है। कोरोना से जान गंवानेवालों की संख्या में तब्दीली संभव है, क्योंकि रिपोर्टेड केस सरकारी अस्पतालों के ही हैं। 70 फीसदी जान गंवानेवाले लोग ऐसे थे जिनकी उम्र 60 या उससे अधिक थी।
स्टडी में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को सभी स्तरों खासकर एपीएचसी लेवल पर दुरुस्त करने का सुझाव दिया गया है। तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए पेडियाट्रिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करने की बात कही गई है। टेस्टिंग को बढ़ने, डाटा मैनेजमेंट, होम आईसोलेशन में रह रहे मरीजों के लिए मोनिटरिंग की व्यवस्था की बात कही गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *