ये हैं बिहार की साइकिल दीदी, गरीब बच्चों को बना रहीं आत्मनिर्भर

बिहार के लिए सुधा वर्गीज ने जो करके दिखाया है, वह अद्भुत है। मूल रूप से तो ये केरल की रहने वाली हैं, लेकिन बिहार में मुसहर जाति के लोगों के लिए जो काम करके उन्होंने दिखाया है, उसकी वजह से ये न केवल इस जाति के लोगों के लिए, बल्कि हर किसी के लिए एक बड़ी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। बिहार में ये साइकिल दीदी के नाम से मशहूर हैं। पद्मश्री से इन्हें सम्मानित किया जा चुका है। लगभग 900 स्वयं सहायता समूह उनके साथ मिलकर इस वक्त विभिन्न सामाजिक कार्यों में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। सुधा वर्गीज नारी गुंजन नामक एनजीओ की अध्यक्ष हैं और ये 30 वर्षों से भी अधिक समय से महिलाओं की शिक्षा के लिए काम कर रही हैं।

जातीय भेदभाव को जाना

मुसहर जाति की महिलाओं को इन्होंने उनके सामाजिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के बारे में बताया और समझाया है। सुधा वर्गीज का कहना है कि केरल से जब वे बिहार आई थीं तो उन्हें जातीय भेदभाव के बारे में इतनी जानकारी नहीं थी। यहां आने के बाद उन्हें पता चला कि मुसहर समुदाय के लोगों की स्थिति क्या है। ऐसे में उन्होंने ठान लिया कि वे उन्हें उनका अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष करेंगी। उन्होंने देखा कि इस समुदाय के लोगों में मृत्यु की सबसे बड़ी वजह कुपोषण है। सुधा वर्गीज ने इस समुदाय के लोगों की न केवल पढ़ाई-लिखाई के लिए काम किया है, बल्कि उन्होंने इनके लिए रोजगार के मार्ग भी प्रशस्त करने की कोशिश की है।

प्रेरणा स्कूल की शुरुआत

Sudha Varghese Spent 30 Years Transforming Lives of Bihar's Musahars

सुधा वर्गीज ने वर्ष 1980 के दशक में एक एनजीओ की शुरुआत की थी, जिसका नाम है नारी गुंजन है। यह बिहार के 5 जिलों में सक्रिय है। वर्ष 2015 में पटना के दानापुर में प्रेरणा के नाम से एक स्कूल भी इस एनजीओ ने शुरू किया था। यहां छात्राओं को छात्रावास की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। कई विद्यालयों की श्रृंखला भी सुधा वर्गीज ने इसके बाद शुरू कर दी और कई शिक्षण संस्थान स्थापित कर दिए, जिनमें 3000 से भी अधिक छात्राओं को आज अच्छी शिक्षा नसीब हो रही है।

कराटे, नृत्य और चित्रकला आदि की ट्रेनिंग

बिहार के 'महादलितों' की अंधेरी जिंदगी में रोशनी ला रही हैं सुधा वर्गीस

सुधा वर्गीज के एनजीओ की तरफ से छात्राओं के लिए न केवल कोचिंग की व्यवस्था की गई है, बल्कि छात्राओं को शारीरिक अभ्यास भी नियमित रूप से कराए जाते हैं। इसके अलावा उन्हें कराटे, नृत्य और चित्रकला आदि की भी ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके। समाज की मुख्यधारा से मुसहर और दलित समुदाय की सिर्फ लड़कियों को ही नहीं, बल्कि सुधा वर्गीज लड़कों को भी जोड़ने के काम में जुटी हुई हैं।

नारी गुंजन सरगम बैंड

महिलाओं को नारी गुंजन सरगम बैंड प्रशिक्षण दे रहा है। केवल महिलाएं ही इस बैंड का हिस्सा हैं। सस्ती कीमत पर महिलाओं को नारी गुंजन सैनिटरी नैपकिन भी उपलब्ध करा रहा है। बच्चियों के लिए जो स्कूल इनके द्वारा चलाए जा रहे हैं, उनमें बिना किसी शुल्क के न केवल इन्हें शिक्षा दी जाती है, बल्कि भोजन और कपड़े आदि भी दिए जाते हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सुधा वर्गीज को मौलाना अबुल कलाम आजाद पुरस्कार से भी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए सम्मानित किया जा चुका है।

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