बिहार का ‘सिकंदर’: नौजवानों जितनी आपकी उम्र नहीं उससे अधिक सालों से लगा रहे पेड़, अबतक लाख पार

पटना

हम आप अपना पूरा जीवन अपने लिए जीते हैं। हम, हमारे बच्चे, हमारे संबंधी, हमारे दोस्त, बस हमारी दुनिया इतने में खत्म हो जाती है। लेकिन कुछ लोग समाज के लिए जीते हैं। अपने जीते जी ऐसा काम कर जाते हैं कि आने वाली पीढ़ियां तक उनका नाम जपती हैं। और बड़ी बात ये कि सारा काम निःस्वार्थ होता है। बिहार के गया के रहने वाले दिलीप कुमार सिकंदर ने भी कुछ ऐसा ही किया है। प्रकृति के प्रति उनका प्रेम देखते ही बनता है। दिलीप कुमार का यह दावा है कि गया के ब्रह्मयोनि पहाड़ पर अब तक वे एक लाख से भी अधिक पौधे रोप चुके हैं। उन्होंने पेड़ों के नाम भी शहीदों के नाम पर रखे हैं।

1982 में की शुरुआत

इस खास खबर को पढ़ने वाले अधिकतक नौजवानों की इतनी उम्र नहीं होगी जितने सालों से दिलीप कुमार ये काम कर रहे हैं। दिलीप कुमार के मुताबिक पौधारोपण का काम उन्होंने इस पहाड़ पर साल 1982 में ही करना शुरू कर दिया था और आज तक वे ऐसा करते आ रहे हैं। दिलीप कुमार के मुताबिक प्रकृति से हमेशा से ही उन्हें बहुत प्रेम रहा है और प्रकृति के निकट रहना ही उन्हें पसंद है। आगे भी वे अपने इस काम को बढ़ाते रहेंगे। दिलीप का कहना है कि हर दिन वे नए पौधे यहां रोपने के लिए पहुंच ही जाते हैं।

यूं लिया संकल्प

अपने बचपन को लेकर दिलीप कुमार ने बताया कि पिकनिक मनाने के लिए यहां वे आया करते थे। तभी एक दिन उन्होंने अपने पिता से यह सवाल किया था कि आखिर इस पहाड़ी पर पेड़-पौधे क्यों नहीं दिखते। तब उनके पिता ने सुनी-सुनाई बात के आधार पर कहा था कि पहले से ही इस पहाड़ पर पेड़-पौधे नहीं रहे हैं। तभी मैंने यह ठान लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए, इस पहाड़ को मैं हरा-भरा बना कर रहूंगा।

गया के ही हैं लौंगी भुइयां जो पहाड़ से पानी उतार लाए

गया के ही लौंगी भुइयां की कहानी भी कुछ समय पहले सामने आई थी, जिन्होंने पहाड़ पर बिना किसी का सहयोग लिए 3 किलोमीटर लंबी नहर अकेले ही खोद डाली थी। इसकी वजह से यहां के लोगों का अपने खेतों में सिंचाई कर पाना मुमकिन हो पाया था। लौंगी भुइयां ने 30 साल तक कड़ी मेहनत की थी। तभी आज 3 गांव के लगभग 3000 लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। लौंगी भुइयां ने जो 3 किलोमीटर लंबी नहर बनाई है, इसकी चौड़ाई 5 फीट और गहराई 3 फीट की है। उनके परिवार वाले हमेशा उन्हें इसके लिए टोकते थे कि आखिर वे यह सब क्या कर रहे हैं। लोग उन्हें चिढ़ाते भी थे। उन्हें पागल तक कहते थे, मगर अपने इस कथित पागलपन में लौंगी भुइयां हमेशा ही मस्त रहे।

आखिरकार उनके प्रयासों की वजह से 30 साल में नहर बनकर तैयार हो गई। आज इसकी बदौलत गांव में सिंचाई हो पा रही है। तभी तो प्रसिद्ध उद्योगपति आनंद महिंद्रा उनसे प्रभावित हो गए थे और उन्होंने उन्हें एक ट्रैक्टर भी भेंट कर दिया था।

दशरथ मांझी की कहानी भी आपको याद ही होगी

कुछ साल पहले बिहार के दशरथ मांझी की भी कहानी सुनने को मिली थी। इनकी कहानी पर एक फिल्म भी बनी थी, जिसमें यह देखने के लिए मिला था कि 25 वर्षों तक पहाड़ को काटकर किस तरीके से एक व्यक्ति ने रास्ता बना दिया था। उनकी इस मेहनत की वजह से लोगों का लंबा रास्ता बेहद कम दूरी में बदल गया था। इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने ऐक्टिंग की थी और फिल्म हिट रही थी।

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