फ्रॉड बिल्डर अनिल कुमार। Image Source : Live Bihar/ Vishal Kumar

जालसाज और रंगबाज बिल्डर अनिल कुमार पर ED का फंदा, गिरफ्तार कर जेल भेजा गया

Patna : पटना में जबरिया जमीनों पर कब्जा करने और विवादित जमीनों पर बिल्डिंग बनाकर लोगों के साथ फ्रॉड करनेवाले बिल्डर अनिल कुमार आखिरकार प्रवर्तन निदेशालय के फंदे में फंस ही गया। प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को उसे पटना के कामेश्वर सिंह काम्प्लेक्स से गिरफ्तार किया है। यह बिल्डिंग भी अनिल कुमार ने ही बनाया था। इसमें उनका ऑफिस भी है। इसके अलावा पाटलिपुत्र एक्जॉटिका होटल भी इसी की है। अनिल कुमार अपने काले कारनामों के लिये सालों से बदनाम है। लेकिन काली कमाई के दम पर यह सबकुछ मैनेज रखता था। पुलिस और प्रशासन दोनों को। स्थिति ऐसी आ गई कि इसने सरकार को भी कई मौके पर चुनौती दी। अपनी काली करतूतों पर पर्दा डालने के लिये इसने मीडिया हाउस शुरू करने से लेकर राजनीतिक पार्टी बनाने तक कई काम किये। पर दिनोंदिन उस पर फंदा कसता ही गया।

फ्रेजर रोड स्थित महाराजा कॉम्प्लेक्स से गिरफ्तार होने के बाद बुधवार को उन्हें पीएमएलए अधिनियम के विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किया गया। विशेष अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में लेने के बाद जेल भेजने का आदेश दिया। राजधानी के कोतवाली, आलमगंज, पाटलिपुत्र समेत अन्य थानों में अनिल के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, रंगदारी, शस्त्र अधिनियम, हत्या के प्रयास के करीब एक दर्जन मामले दर्ज हैं। अनिल पर आरोप है कि उसने अवैध रूप से 12 करोड़ 61 लाख रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति अर्जित की है।
अनिल की संपत्ति की जांच ईओयू ने की थी। ईओयू ने पाया था कि अनिल ने अवैध रूप से 12.61 करोड़ की चल-अचल संपत्ति अर्जित की थी। अनिल की संपत्ति की जांच के बाद उसने रिपोर्ट ईडी को सौंप दिया। उसके बाद ईडी ने मामला दर्ज किया और फिर अनिल को गिरफ्तार कर लिया। अनिल ने कई लोगों को जमीन और फ्लैट देने के नाम पर मोटी रकम ली। अनिल के खिलाफ हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट का भी मामला दर्ज किया गया था। बिल्डर अनिल सिंह पर 13 मुकदमे चल रहे हैं। इनमें से 9 कोतवाली में, 3 गांधी मैदान में और 1 आलमगंज थाने में दर्ज है।

 

इन मामलों में पुलिस ने अनिल की गिरफ्तारी के लिये कोई ठोस पहल नहीं की। यहां तक ​​कि डायरी भी किसी भी हाल में पूरी नहीं हुई। न ही पुख्ता सबूत जुटाने की कोशिश की गई। बिल्डर अनिल सिंह की पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोतवाली, गांधी मैदान समेत आलमगंज थाने में धोखाधड़ी, मारपीट, एससी-एसटी एक्ट, पैसे से फ्लैट न देने, जमीन पर जबरन कब्जा करने समेत 13 से ज्यादा मामले हैं। लेकिन, पुलिस किसी भी सूरत में बिल्डर को छू भी नहीं पाई। यहां तक ​​कि पुलिस ने किसी मामले में न तो केस डायरी पूरी की और न ही मामले की जांच करने की कोशिश की।

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