लोकसभा चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से गरमाई राजनीति, बीजेपी और कांग्रेस दोनों को होने वाला है घाटा

फैसला शीर्ष अदालत ने योजना को असंवैधानिक करार दियासुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड निरस्त किए :

उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को ‘चुनावी बॉन्ड योजना’ को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त कर दिया। पीठ ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ सूचना के अधिकार जैसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।

केंद्र सरकार ने सियासी दलों को चंदा देने के लिए यह योजना छह वर्ष पहले शुरू की थी। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, बीआर गवई, जे.बी. पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने एसबीआई को तत्काल प्रभाव से चुनावी बॉन्ड जारी करने से रोक दिया।

पीठ ने कहा, एसबीआई 12 अप्रैल, 2019 के अंतरिम आदेश के बाद से अब तक खरीदे गए ऐसे सभी बॉन्ड का ब्योरा छह मार्च तक निर्वाचन आयोग को दे। इसमें खरीद की तारीख, खरीदने वाले का नाम और मूल्य बताने को कहा गया है। पीठ ने एसबीआई से बॉन्ड भुनाने की तिथि भी बताने को कहा।

पीठ ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह 13 मार्च तक वेबसाइट पर ब्योरा दे। कोर्ट ने कांग्रेस नेता जया ठाकुर के अलावा स्पंदन विश्वास समेत अन्य की याचिका पर सुनवाई में यह निर्णय दिया।

सुप्रीम फैसला P06

चुनावी बॉन्ड वह वित्तीय तरीका है, जिसके माध्यम से राजनीतिक दलों को चंदा दिया जाता है। इसमें बॉन्ड के खरीदार या भुगतानकर्ता का नाम नहीं होता है, स्वामित्व की कोई जानकारी दर्ज नहीं की जाती और इसमें धारक (यानी राजनीतिक दल) को इसका मालिक माना जाता है।

क्या है चुनावी बॉन्ड

कैसे काम करता है

यह योजना भारतीय नागरिकों और घरेलू कंपनियों को बॉन्ड के जरिए दान की अनुमति देती है। यह एक हजार, 10 हजार, एक लाख, 10 लाख और एक करोड़ रुपये के गुणांक में हो सकता है। इन बॉन्ड को राजनीतिक पार्टियों द्वारा 15 दिनों के भीतर भुनाया जा सकता है।

चुनावी बॉन्ड को भाजपा ने रिश्वत और कमीशन का जरिया बना दिया था। उच्चतम न्यायालय के फैसले से इस बात पर मुहर लग गई है।

राहुल गांधी, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष

भाजपा फैसले का सम्मान करती है। केंद्र सरकार ने चुनाव के लिए चंदे की व्यवस्था में सुधार के प्रयास किए हैं और चुनावी बॉन्ड इसी का हिस्सा है।

रविशंकर प्रसाद, पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *