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मिसाल- जो टूट गये थे उन्हें हीरा बनकर चमकना सिखाया चनपटिया ने, विदेशों में भी डंका बजा

Patna : बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के चनपटिया में शुरू किया गया स्टार्टअप ज़ोन कई लोगों के लिये एक बड़ी सफलता की कहानी बन गया है, जो देश में कोविड -19 महामारी की चपेट में आने के बाद राज्य में वापस लौटे हैं। इससे न केवल कुशल मजदूरों को जिला प्रशासन की मदद से अपना खुद का ब्रांड स्थापित करने में मदद मिली है, बल्कि गृह जिले में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा हुये हैं। इस पहल की सफलता का मूल्यांकन इस तथ्य से किया जा सकता है कि यहां निर्मित विभिन्न उत्पादों को स्पेन, नेपाल और बांग्लादेश जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात किया जा रहा है। लिस्सो नामक कपड़ों के ब्रांड के मालिक मृत्युंजय शर्मा महामारी के कारण अपनी नौकरी गंवाने के बाद दिल्ली से राज्य लौट आए। जिला प्रशासन ने उन्हें अपना खुद का ब्रांड स्थापित करने के लिये प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) ऋण के तहत 25 लाख का लाभ उठाने में मदद की। अब, थोड़े समय के भीतर, उन्हें थोक में ऑर्डर मिलने लगे और कुल लेन-देन एक महीने में करोड़ों तक पहुंच गया।

इस प्रोडक्शन हब के स्टार्टअप्स पर देश भर से भारी ऑर्डर आ रहे हैं। सूरत और गुजरात के अन्य शहरों से आयातित उत्पादों की तुलना में बहुत कम कीमत पर जिले के भीतर उत्पाद उपलब्ध होने के साथ, छोटे शहर की आर्थिक गतिविधियों को जोड़ते हुये कई नई दुकानें भी अस्तित्व में आईं हैं। 35 वर्षीय आमिल हुसैन को ही लीजिये। दुबई में एक कपड़ा कंपनी में काम करता था और कोविड -19 की पहली लहर के बाद वापस लौटा। जिला प्रशासन के सहयोग से उन्होंने सूफिया टेक्सटाइल नाम से अपना खुद का ब्रांड शुरू किया और अब उनकी कंपनी स्थानीय बाजारों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों में भी ऑर्डर की आपूर्ति करती है।
उन्होंने बताया- यहाँ वापस लौटने के बाद मुझे कुछ पता नहीं चला। स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होने लगी और मैंने काम पर वापस जाने की सारी उम्मीदें खो दीं। स्थानीय अधिकारियों द्वारा शुरू किये गये कौशल मानचित्रण परीक्षण के दौरान, मुझे शीर्ष अधिकारियों के साथ बातचीत करने का अवसर मिला, जिन्होंने मुझे अपनी कंपनी स्थापित करने में बहुत मदद की। अधिकारी संपर्क में रहे और शुरू में व्यवसाय को विकसित करने के लिये आवश्यक मदद की। अब हमें बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं और स्थानीय बाजारों से मांग को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

इसी तरह बर्तनों का कारोबार करने वाले आरती इंडस्ट्रीज के मालिक आनंद कुमार ने दिल्ली से अपनी दो फैक्ट्रियां बंद कर चनपटिया में स्टार्टअप जोन में निवेश किया। उन्होंने कहा- घर पर काम करने का ऐसा मौका मिलना कुछ ऐसा है जिसकी मुझे सालों से तलाश थी। मैंने पहल के बारे में जानने के बाद सभी मशीनों और इन्वेंट्री को दिल्ली से यहां स्थानांतरित कर दिया। उन्होंने कहा कि मेरे उत्पादों की आपूर्ति देश के विभिन्न राज्यों और नेपाल में भी की जा रही है।
पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी कुंदन ने बताया- इस साल की शुरुआत में भारत में कोविड-19 के कहर के बाद कई कुशल और अकुशल श्रमिक राज्य में वापस लौट आये। संगरोध केंद्रों में कौशल मानचित्रण अभ्यास के बाद, हमने पाया कि उनमें से कुछ कपड़ा, चमड़ा और लकड़ी के शिल्प क्षेत्र में उच्च प्रशिक्षित और कुशल हैं। हमने यहां इन सभी उपक्रमों को स्थापित करने के तरीके तलाशने शुरू किये। हमने उन लोगों की एक बैठक बुलाई जो वर्षों पहले बिहार छोड़कर इन क्षेत्रों में पारंगत हो गये थे। उन्होंने माल के थोक उत्पादन के लिये आवश्यक नवीनतम तकनीक, मशीनों और कच्चे माल के इनपुट प्रदान किये। परियोजना के त्वरित कार्यान्वयन के लिये सकारात्मक परिणाम देने वाले प्रत्येक उद्यम के लिये एक एकल वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त किया गया।

जिले के अधिकारियों ने उन्हें कच्चा माल, मशीनरी खरीदने और राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अपने उत्पादों को बेचने में मदद करने सहित सभी आवश्यक सहायता प्रदान की। यहां निर्मित उत्पादों का निर्यात स्पेन, नेपाल और बांग्लादेश जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी किया जाता है। पश्चिम चंपारण में इस पहल का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले साल दिसंबर में किया था।

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