नौकरी छोड़ तालाब में मोती की खेती करने लगा बिहार का ये किसान, पैसे कमाने के इस मॉडल को समझिए

पटना

जहां चाह वहां राह। हम में से हर किसी न इस लाइन को जीवन में कभी न कभी सुना जरूर होगा। लेकिन इसे जीवन में किसी ने उतारा तो वो हैं बिहार के बेगुसराय के किसान जयशंकर। अपनी नौकरी वाली जिंदगी में खुशियां मिलती न देख इन्होंने मिट्टी की तरफ लौटने का फैसला किया। फिर क्या था, तालाब में ही मोती उगने लगा और लाखों रुपये कमाई का एक ऐसा मॉडल उनके हाथ लगा, जिससे आज उनका जीवन खुशियों से भरा हुआ है। ऐसा नहीं है कि जयशंकर ने इस मॉडल का आविष्कार किया है। इस मॉडल पर पहले भी काम होता रहा है। जब कोरोना ने हमारी अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है तब हम आपके लिए ऐसी सक्सेस स्टोरी सामने ला रहे हैं जिनसे आपको नए-नए आइडिया मिलें और साथ में हौसला भी।

क्लर्क की नौकरी में नहीं लगता था मन

जयशंकर बताते हैं कि वह एक गरीब किसान पारिवारिक बैकग्राउंड से आते हैं। उन्होंने सीएम साइंस कॉलेज, दरभंगा से पढ़ाई की है। जैसा कि सामान्य घरों के लड़कों को करना पड़ता है, जयशंकर को भी पढ़ाई के बाद एक अदद नौकरी की तलाश करनी पड़ी। काफी जद्दोजहद के बाद क्लर्क की नौकरी लेगी लेकिन इसमें मन नहीं लगा। इसके बाद उन्होंने सोचा कि मिट्टी से जुड़कर उनके पुरखे आगे बढ़ते रहे, इसलिए वह भी मिट्टी से ही जुड़ा कोई काम करेंगे। इसी बीच किसी मैग्जीन को पढ़ते वक्त उन्हें मोती की खेती के बारे में पता चला। फिर क्या था। मानों उन्हें अंधेरे में उजाले की किरण दिख गई। जयशंकर ठान चुके थे कि अब उन्हें मोती की खेती करनी है।

2009 में यूं हुई शुरुआत

जयशंकर को पता चला कि भुवनेश्वर का इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ फ्रेशवॉटर एक्वाकल्चर से इस बारे में जानकारी मिलेगी। वहां उन्हें ट्रेनिंग तो नहीं मिली लेकिन एक पुराने क्षात्र ने कौड़ी से मोती की खेती करने की पूरी प्रक्रिया समझाई। इसके बाद जयशंकर ने 2009 में एक बीघे जमीन पर 5 फीट की गहराई वाला तालाब खुदवाया। उन्होंने शुरुआत में मीठे जल वाले ताल-तलैया से जिंदा सीप इकट्ठा किए। इसकी प्रक्रिया समझाते हुए वह बताते हैं कि आप जिस आकृति का मोती चाहते हैं उसी आकृति में कैल्शियम कार्बोनेट का टुकड़ा जिंदा सीप के शरीर में डालना होता है।

ऐसे बनती है मोती

जयशंकर बताते हैं कि इस प्रक्रिया में सीप को कष्ट पहुंचता है और उसके शरीर से एक केमिकल का रिसाव होता है। इसमें कैल्शियम होता है। यह रिसाव कैल्शियम कार्बोनेट के टुकड़े पर जमने लगता है। छह महीने की अवधि में मनचाहे आकार में आपका मोती तैयार हो जाता है। हालांकि ये सबकुछ आप इतनी आसानी से नहीं कर सकते। किसी भी चीज को करने से पहले आपको उसकी ट्रेनिंग और प्रॉपर ज्ञान हासिल करना पड़ता है।

500 तक लागत, 5000 तक कीमत

जयशंकर के मुताबिक एक सीप से मोती तैयार करने में 500 रुपये तक खर्च आता है। वहीं बाजार में मोती के 5000 रुपये तक मिल जाते हैं। जयशंकर तालाब में मोती की खेती के साथ मछली पालन भी करते हैं। सीपियां तालाब के पानी को साफ कर देती हैं, जिससे मछलियां भी स्वस्थ रहती हैं। जयशंकर के मुताबिक बिहार में इस मोती की खेती का स्कोप काफी अच्छा है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां ताजे और मीठे पानी का स्रोत काफी ज्यादा है। जयशंकर इस खास खेती की ट्रेनिंग भी देते हैं।

 

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