सड़कों पर फेंके गये अलग अलग किस्म के आम। Image Source : ANI

किसानों के आम, कौड़ियों के दाम : सड़कों पर फेंक दिये कई टन तोतापुरी और बेनिशान आम

New Delhi : देश के सबसे मशहूर आम की ऐसी दुर्गति हो गई है कि वे सड़कों पर फेंके मिल रहे हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं तोतापुरी आमों की। किसान परेशान हैं कि उनको कीमत नहीं मिल रही। हमें अच्छे आम नहीं मिल रहे। पूरे सिस्टम में ही कहीं लोचा नजर आता है। बहरहाल कर्नाटक के श्रीनिवासपुरा के कोलार जिले में दामों में गिरावट के कारण किसानों ने आमों की कुछ किस्मों को फेंक दिया है। और तो और तोतापुरी भी सड़कों पर फेंक दिया गया है। जबकि आम के इस किस्म की शोहरत हाल के दिनों में काफी बढ़ी थी और पूरे देश में इसकी डिमांड थी। इसके अलावा कुछ और भी पॉपुलर आमों की किस्म का कोई नामलेवा नहीं है। किसानों ने इन आमों को सड़कों पर फेंक दिया है और आते जाते राहगीर जिन्हें आम पसंद हो उठा कर ले जा रहे हैं।

न्यूज एजेन्सी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक फंगल इंफेक्शन के कारण बंगनपल्ली, बेनिशान और तोतापुरी किस्मों की कीमतें तेजी से गिरी हैं, इसलिए आमों को फेंक दिया गया है अब किसान सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। आम उत्पादकों की दुर्दशा के बारे में बताते हुये कोलार जिला मैंगो ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, नीलातुरु चिन्नप्पा रेड्डी ने एएनआइ को बताया – पिछले सालों की तुलना में आम उत्पादकों को इस साल विशेष रूप से नुकसान हो रहा था और वे नुकसान सहन करने में असमर्थ थे। यही कारण है कि किसान अपनी उपज को फेंक रहे हैं। यह हमारे देश को शर्मिंदा करनेवाली तस्वीरें तो हैं, लेकिन सच हैं।
उन्होंने कहा- आम की तोतापुरी और बेनिशान किस्मों के लिये कोई खरीदार नहीं हैं। प्रत्येक टन बेनिशान को 2019 में 1 लाख रुपये और पिछले साल 50,000 रुपये से 80,000 रुपये के बीच बेचा गया था। हालांकि, इस साल कीमत घटकर मात्र 10,000-15,000 रुपये प्रति टन रह गई है। किसान ट्रांसपोर्टेशन खर्च को कवर करने के लिये भी संघर्ष कर रहे हैं।
नीलातुरु चिन्नप्पा रेड्डी ने बताया- इस साल इन किस्मों के लिये तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के खरीदारों से कोई खरीदार नहीं था। हमारे यहां कोलार या चिकबल्लापुर में कारखाने भी नहीं हैं जो गुदे को स्टोर और इकट्ठा करते हैं। श्रीनिवासपुरा में तोतापुरी किस्म 60,000 हेक्टेयर से अधिक में उगाई जा रही है, और इस किस्म की कीमतों में गिरावट के साथ किसान बेहद चिंतित हैं। अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

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