खेती करने के लिए बिहार के इस शख्स ने छोड़ी सीए की नौकरी, कमाई जान होंगे हैरान

पटना: चार्टर्ड अकाउंटेंट की नौकरी पाने के लिए लोग कितनी मेहनत कहते हैं, लेकिन यदि आपको यह पता चले कि एक व्यक्ति ने चार्टर्ड अकाउंटेंट की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर खेती करनी शुरू कर दी, तो इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी? राजीव बिट्टू नाम के एक व्यक्ति ने ऐसा ही किया है। राजीव बिट्टू बिहार के रहने वाले हैं। उनके पिता सिंचाई विभाग में इंजीनियर के तौर पर कार्यरत थे।

रांची के कॉलेज से की पढ़ाई

राजीव ने आईआईटी के लिए तैयारी की थी, लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिलने के बाद उन्होंने पहले रांची के एक कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई की और फिर सीए की तैयारी करने लगे। खेती करने के बारे में उन्होंने अलग-अलग जगहों से बहुत सारी जानकारी हासिल की। इसके लिए वे कई विश्वविद्यालयों में भी गए।

किसान की जमीन ली लीज पर

उन्होंने रांची से लगभग 28 किलोमीटर की दूरी पर कुच्चू गांव में 10 एकड़ की एक जमीन को किसान से लीज पर ले लिया था। यह तय हुआ था कि मुनाफे का 33 प्रतिशत वे किसान को देंगे। यहां उन्होंने जैविक तरीके से खेती की। उन्हें 7 से 8 लाख रुपये का मुनाफा भी हुआ।

जब बेटी को लेकर गए गांव

दरअसल हुआ यह था कि राजीव ने 2003 में सीए की पढ़ाई पूरी कर ली थी और अपना खुद का ऑफिस शुरू करके 40 से 50 हजार रुपये की कमाई कर रहे थे। एक बार अपनी 3 साल की बेटी को लेकर वे गांव गए थे, तो वहां एक किसान ने जब उनकी बेटी को अपनी गोद में लेना चाहा, तो बेटी ने यह कहकर मना कर दिया कि किसान के कपड़े कितने गंदे हैं।

यूं किया फैसला

राजीव को यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा कि जो इंसान अनाज उगा कर हमारा पेट पाल रहा है, उसके साथ ऐसा व्यवहार कैसे किया जा सकता है। इसलिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर खेती करने का फैसला कर लिया। अच्छी-खासी सीए की नौकरी उन्होंने छोड़ दी और खेतों में खरबूज, चेरी, टमाटर, खुर और स्वीट कॉर्न आदि उगाने लगे।

करोड़ों के टर्नओवर तक

राजीव यह भी मानते हैं कि सीए की पढ़ाई से उन्हें खेती में काफी मदद भी मिली। राजीव का लक्ष्य है कि वे एक करोड़ का टर्नओवर हासिल कर लें। अंकुर रूरल एंड ट्राईबल डेवलपमेंट सोसाइटी का भी राजीव संचालन कर रहे हैं। इसके जरिए वे किसानों को तकनीकी मदद मुहैया करा रहे हैं।

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