बिजली के लिए अब सौर ऊर्जा का सहारा, खपत का 10% लेना ही होगा

पटना : बिहार में बिजली आपूर्ति के लिए सौर ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाई जा रही है। अब सरकार ने जरूरत का कम से कम 10 प्रतिशत बिजली सौर ऊर्जा से लेने का प्रावधान बनाया है। 2030 तक इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक किया जाएगा। फिलहाल आठ प्रतिशत अनिवार्य है। सरकार ने प्रावधान में यह भी कहा कि जरूरत का कम से कम 10 प्रतिशत बिजली सौर ऊर्जा से नहीं लेने पर दंड लगाया जाएगा। बता दें सरकार ने 1200 मेगावाट सौर ऊर्जा के लिए कांट्रैक्ट किया है। इसमें अपने सौर ऊर्जा से 128 मेगावाट उत्पादन है। सूबे को फिलहाल 5000 से 5500 मेगावाट बिजली की जरूरत है। इस साल के अंत तक यह 7200 मेगावाट हो जाएगी। इसको देखते हुए सूबे को कम से कम 700-750 मेगावाट बिजली का उत्पादन सौर ऊर्जा से करना होगा। फिलहाल सौर, पवन और अपारंपरिक ऊर्जा स्त्रोत से 500 मेगावाट बिजली मिल रही है। बिजली कंपनी लगातार सौर ऊर्जा से आपूर्ति बढ़ाने के लिए काम कर रही है।

सौर ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने के लिए योजना तैयार
सूबे में सौर ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने के लिए कार्य योजना बना ली गई है। इसके तरह सरकारी भवनों, रुफ टॉप बिजली से लेकर बेकार जगहों पर सोलर प्लेट लगाए जाएंगे। आधा दर्जन परियोजनाओं से बिजली बन रही है। जबकि दो दर्जन से अधिक परियोजनाओं से बिजली उत्पादन प्रस्तावित है। लखीसराय जिले के कजरा और भागलपुर के पीरपैंती में 1320 मेगावाट की क्षमता वाले थर्मल पावर प्लांट की जगह 500 मेगावाट की सौर ऊर्जा प्लांट लगाए जाएंगे।

पनबिजली उत्पादन में बनाया नया रिकॉर्ड
पनबिजली उत्पादन में बिहार ने नया रिकॉर्ड बनाया है। पिछले वित्तीय वर्ष में रिकॉर्ड 4.22 करोड़ यूनिट पनबिजली का उत्पादन किया गया है। सूबे के 13 पनबिजली घरों में बिजली का उत्पादन हुआ। सोन, गंडक और कोसी नदी पर पनबिजली घर बना है। सोन स्थित डेहरी, वरुण, अगनूर, बेलासार, अरवल, ढेलाबाग, नासरीगंज, सेवारी, श्रीखिंडा और जगनगरा पनबिजली घर में बिजली बनाई जा रही। गंडक स्थित वाल्मीकिनगर और त्रिवेणी में पनबिजली घर है।

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