मां, कुलदीप द्विवेदी और उनके पिता। Image Source : YouTube/Drishti IAS

चौथी पास मां के इस मंत्र से सिक्यूरिटी गार्ड के बेटे ने पास कर ली IAS की परीक्षा

New Delhi : जब कुछ करने का जुनून व लगन हो तो संसाधन व पैसा बाधा नहीं बन सकते। और इस बात को सच कर दिखाया उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव के रहने वाले कुलदीप द्विवेदी ने। कुलदीप के पिता एक यूनिवर्सिटी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। जाहिर है कि गार्ड की नौकरी के आय से परिवार का पालन पोषण करना व कुलदीप के पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल था। कई बार एक जून की रोटी तक नसीब नहीं होती थी। लेकिन 12वीं पास पिता व 5वीं में ही पढ़ाई छोड़ चुकी मां को यह जरूर पता था कि जीवन को सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई ही बदल सकता है। और यही मंत्र दोनों ने कुलदीप को भी दिया। मां-बाप के इस मंत्र को कुलदीप ने गांठ बांध लिया। और उस मुकाम पर पहुंचे जहां पहुंचने के लिए लगभग हर युवा सपना देखता है। लेकिन कुलदीप ने अपने हालातों को दुख नहीं बनने दिया। बस उसे जीवन संघर्ष के रूप में लिया और एक दिन सिविल सर्विसेस के अधिकारी पद तक पहुंचे।

कुलदीप की पारीवारिक स्थिति
कुलदीप यूपी के नागोहा जिले के शेखपुर गांव के निवासी हैं। पिता लखनऊ यूनिवर्सिटी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। कुलदीप अपने तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। परिवार में कुल पांच सदस्य हैं। एक सिक्योरिटी की नौकरी से पांच लोगों के परिवार को चला पाना मुश्किल था लेकिन पिता ने कुलदीप को पढ़ने से कभी नहीं रोका। कुलदीप ने हिंदी मीडियम से एमए तक की पढ़ाई की। उसके बाद वे ऑफिसर बने।
किताब खरीदने के लिए पैसे नहीं होते थे
यूपीएससी द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षा सिविल सर्विसेस की तैयारी के लिए कुलदीप दिल्ली पहुंच गए। किराए के कमरे में रहते हुए उन्होंने अपनी तैयारी शुरू कर दी। पिता मात्र महीने का 1500-2000 रुपए ही भेज पाते थे। इतने कम रुपए खर्च चलाना मुश्किल होता था। इसलिए कुलदीप पढ़ने के लिए दोस्तों से किताबें उधार लिया करते थे।

कड़ी मेहनत के बावजूद कुलदीप को दो बार असफलता हाथ लगी लेकिन कुलदीप ने हार नहीं मानी और डटे रहे। आखिरकार तीसरे प्रयास में 2015 में 242 वीं रैंक के साथ उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली।

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