गुप्तेश्वर पांडेय भगवान में लीन होकर कथावाचन करते हुये। Image Source : Social Media

गुप्तेश्वर पांडेय ने अपने कथावाचक बनने का राज खोला- बालपन से ही मंदिरों में प्रवचन देता रहा हूं

Patna : मीडिया में हमेशा छाये रहनेवाले पूर्व पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय हाल ही में फिर से सुर्खियों में आ गये। जब उन्होंने कथावाचक बनने का निर्णय लिया। सारे अखबारों में, चैनल में सुर्खियां लूटने और सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर वायरल होने के बाद अब उन्होंने स्पष्ट किया है कि आखिर वे कथावाचक क्यों बन गये। उन्होंने बातचीत करते हुये कहा- एक समय ऐसा आता है जब सबलोग अपने जीवन के उद्देश्य को जानना चाहते हैं। ईश्वर को जानना चाहते हैं। मैं कोई अपवाद नहीं हूं। मेरी दिलचस्पी अब सिर्फ भगवान में है। ऐसा नहीं है कि यह अचानक हो गया हो। मुझे बचपन से भगवान और आध्यत्म में रुचि रही है। मैं बालपन से ही प्रवचन देता आया हूं। संयोग से नौकरी के दौरान ड‍्यूटी की शर्तों का पालन करते हुये कभी प्रवचन नहीं दिया।

पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा- मैं 14 साल के बालपन से ही हनुमान जयंती, रामनवमी जैसे मौकों पर लोगों को मंदिर में प्रवचन सुनाया करता था। आध्यात्म में बहुत रुचि रही है। इसमें नया कुछ नहीं है। जब तक आईपीएस की नौकरी में था तो भी मैंने कई अनुष्ठानों में हिस्सा लिया, लेकिन ड्यूटी के दौरान ऐसे कथा कहने की इजाजत नहीं थी। ईश्वर के चरणों में जगह पाना इंसान का अंतिम लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि इसमें समाचार बनाने जैसी कोई बात तो नहीं थी और मैं यह चाहता भी नहीं था कि समाचार बने लेकिन अब जब समाचार आ गया है तो मैं सारे न्यूजमैन को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मेरी भूमिका और जीवन के बारे में लोगों को जानकारी दी।
बहरहाल पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय नये अवतार में फब रहे हैं। पब्लिक को श्रीमद्भागवत कथा सुना रहे हैं। पीतांबर परिधान। गले में सफेद फूलों की मोटी माला। कांधे पर रंगीन पट्‌टा। और जुबान पर सतोगुण, तमोगुण, रजोगुण, ब्रह्म, वैराग्य, मोक्ष जैसी बातें। अपने इस नये अवतार के बारे में पूछने पर कहा- इन सब में रूचि तो पहले से थी ही। लोगों ने आग्रह किया, तो कर रहा हूं। और राजनीति … उन्होंने कहा अभी तो धर्म-कर्म कर रहा हूं
बता दें कि बतौर पुलिस निदेशक भाषण देने के लंबे अनुभव के बाद वे राजनीति में अपना किस्मत आजमाने चले गये। पर वहां अभी तक कुछ मिला ही नहीं। विधानसभा चुनाव में उनको बक्सर से टिकट मिलने की उम्मीद थी लेकिन उनका टिकट हवलदार से ही राजनेता बने परशुराम चतुर्वेदी ने भाजपा से हासिल कर लिया। और वे तमाम आश्वसनों के बाद भी पैदल हो गये जबकि उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आश्वासन के बाद वीआरएस लिया था। पर नीतीश कुमार की चुप्पी ने पांडेय जी को अयोध्या के हनुमान गढ़ी में भगवान की चरणों में सेवादार बना दिया। पूर्व डीजी बोलें- लोकमंगल और अपने लिये ज्ञान, वैराग्य और भक्ति की भीख मांगने के लिये अयोध्या के हनुमान गढ़ी में अपने इष्टदेव श्री हनुमान जी के दरबार में हाजिरी लगाई है। मेरे प्रभु सबको सुबुद्धि दो और सबका कल्याण करो। बस यही कामना है।
बतातें चलें कि गुप्‍तेश्‍वर पांडेय ने 12 साल पहले 2009 में भी राजनीति में एंट्री की कोशिश की थी। तब आइजी रहते हुये उन्होंने वीआरएस लिया था। वे बक्‍सर से लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उस समय भी उन्‍हें टिकट नहीं मिला था। इसके बाद उन्होंने अपना वीआरएस वापस ले लिया था। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी उनके जेडीयू या भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर बक्सर सीट से चुनाव लड़ने की संभावना थी। लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने फेसबुक पर पोस्‍ट लिखा – सेवामुक्त होने के बाद सबको उम्मीद थी कि मैं चुनाव लड़ूंगा, लेकिन मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहा। हताश निराश होने की कोई बात नहीं है। धीरज रखें। मेरा जीवन संघर्ष में ही बीता है। मैं जीवन भर जनता की सेवा में रहूंगा। मेरा जीवन बिहार की जनता को समर्पित है। अपनी जन्मभूमि बक्सर की धरती और वहां के सभी जाति, मजहब के बड़े-छोटे, भाई-बहनों, माताओं और नौजवानों को प्रणाम करते हुये लिखा कि उनके चाहने वाले अपना प्यार और आशीर्वाद बनाये रखें।
पर कुछ ही महीनों में उनका राजनीति को लेकर जो धैर्य था वो जवाब दे गया। बक्सर की पब्लिक के बीच ताउम्र रहने की बात करनेवाले पांडेय अयोध्या कथावाचन को चले गये। इसीलिये तो कहते हैं… मन बड़ा वाचाल है, इस पर नियंत्रण ही जीवन को श्रेष्ठ बनायेगा।

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