बिहार चुनाव के 2 ट्विस्ट: पांडे जी संग क्यों हुआ प्रैंक और VIP संग BJP का खेल

पटना

बिहार विधानसभा चुनाव का यलगार हो चुका है और आज हम आपको इस चुनाव से जुड़े दो ट्विस्ट एक साथ बताने जा रहे हैं। आप सभी ने सोशल मीडिया पर कभी न कभी कोई न कोई ऐसा प्रैंक जरूर देखा होगा जिसमें एक कैमरा छिपा होता है और लोग किसी से कोई मजाक कर रहे होते हैं। अंत में उनसे कहा जाता है कि आपके साथ एक छोटा सा प्रैंक हुआ है, जरा सामने कैमरे की तरफ देखकर मुस्कुरा दीजिए। और जिसके साथ प्रैंक हो रहा होता है वो बेचारा झेंप जाता है। अब यही हाल बिहार के पांडे जी का हो गया है। वैसे तो बिहार के सुधी पाठकों को पांडे जी का मतलब समझाने की जरूरत नहीं फिर भी जिसे नहीं समझ में आया, जान लीजिए कि हम पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की बात कर रहे हैं। और खबर के अंत में मुकेश साहनी की पार्टी वीआईपी संग बीजेपी के खेल की जानकारी भी देंगे।

बहुत शोर सुनते थे पहलू में दिल का जो चीरा तो…

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एक बड़ा मशहूर शेर है कि बहुत शोर सुनते थे पहलू में दिल का… इस पूरे शेर को पढ़ने के लिए आप गूगल कर सकते हैं। हम बात अभी पांडे जी पर फोकस रखेंगे। तो पिछले दिनों बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने राजनीति में एंट्री का ऐलान करते हुए समय पूर्व रिटायरमेंट की घोषणा कर दी। लगे हाथ वो जदयू में शामिल भी हो गए। पांडेय जी ने खुद को बक्सर का बेटा इत्यादि कहना भी शुरू कर दिया। लेकिन असल खेल हुआ कि एनडीए में ये सीट भाजपा के खाते में चली गई। ऊपर से दूसरा खेल ये कि पांडे जी को जदयू ने दूसरी किसी सीट से अबतक टिकट भी नहीं दिया है।

कौन ठगवा नगरिया लूटल हो राम

अब चर्चा चंहुओर यही हो रही है कि पांडे जी के साथ फ्रैंक हो गया क्या। सोशल मीडिया पर धुंआधार तरीके से मीम शेयर किए जा रहे हैं। खैर पांडे जी अभी भी सच्चे सिपाही वाली स्प्रिट में ही नजर आ रहे हैं। इस पूरे मामले में जब मीडिया ने उनसे राय डाननी चाही तो भावुकता से उन्होंने पहले ये स्वीकार किया कि जैसा आप सोचते हैं, राजनीति में कभी कभी वैसा नहीं भी होता। हालांकि वो यह भी कह रहे हैं कि ठगा महसूस नहीं कर रहे हैं क्योंकि नीतीश कुमार किसी को ठगते नहीं। अब पांडे जी तो कहेंगे ही क्योंकि पार्टी के सिपाही का काम ही ऐसा कहना होता है। लेकिन सोशल मीडिया पर लोग जरूर गा रहे हैं कि कौन ठगवा नगरिया लूटल हो राम।

अब भाजपा के भी खेल के बारे में जान ही लीजिए

चलिए अब ट्विस्ट नंबर दो पर चलते हैं। पिछले दिनों सन ऑफ मल्लाह से फेमस मुकेश साहनी ने महागठबंधन का साथ छोड़ दिया। वजह थी कि वो 25 सीट और डिप्टी सीएम का पद मांग रहे थे जो उन्हें नहीं मिला। बाद में वो एनडीए में शामिल हो गए। एनडीए के सीट बंटवारे में मुकेश साहनी को भाजपा के कोटे से 11 सीटें मिल गईं। महागठबंधन में 25 सीटें मांगने वाले मुकेश साहनी यहां 11 सीटों पर ही संतुष्ट बताए गए। लेकिन लगता है कि भाजपा उनके संतोष में और इजाफा करने की तैयारी में थी। इस वजह से मुकेश साहनी को 11 में से भाजपा ने 7 ऐसी सीटें दे दी हैं जिनपर वह 2015 के चुनाव को हार चुकी है। अब आप खेल समझ गए होंगे, वैसे भी बिहार की जनता राजनीतिक रूप से सबसे जागरूक जो है।

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