बिहार में बाढ़ से बिगड़े हालात। Image Source : PTI

बाढ़ संग खुशियों भी बह गईं- खाने को दाने नहीं, फसल चौपट, कर्ज चढ़ा माथे पर, जिंदा रहना चुनौती

Patna : बिहार में जैसे-जैसे बाढ़ का जलस्तर कम होता जा रहा है बाढ़ की विभीषिका का विकराल असर भी दिख रहा है। कई इलाकों के लोग इस बार फिर से बेघर हो गये हैं। भोजन नहीं मिल रहा। साफ पानी नहीं है। मवेशी को खिलायें तो क्या? सूझ ही नहीं रहा। बिहार में चौतरफा यह नजारा आम हो गया है। लोगों की फसल डूब गई है। लागत तो गया ही, अगले साल अब क्या करेंगे, यह बड़ी समस्या है। हाजीपुर और सारण के बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उनके घर और खेत बाढ़ के पानी में डूब गये हैं। जबकि हाजीपुर में लोग अपने मवेशियों और परिवार के साथ अधिक ऊंचाई पर चले तो गये हैं लेकिन इन हालातों में जीवन यापन कर पाना मुश्किल होता जा रहा है। बाढ़ के पानी ने सारण में फसलों को नुकसान पहुंचाया है और किसानों को भारी नुकसान और कर्ज में डाल दिया है।

हाजीपुर की एक स्थानीय निवासी इंदु देवी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया- हमें अपने घरों को छोड़ना पड़ा क्योंकि बाढ़ के पानी ने चारों ओर से डुबो दिया था। अब हम बेघर हैं। परिवार, बच्चों और मवेशियों के साथ आये थे लेकिन जीवित रहना कठिन हो गया है। कभी-कभी हमें भोजन मिलता है, कई बार हमें भूखे रहना पड़ता है। एक दूसरे बाढ़ पीड़ित ने बताया- गंगा नदी में बाढ़ ने कमर के स्तर तक हमारे घरों को जलमग्न कर दिया है। इसलिये हम परिवार और मवेशियों के साथ ऊंचाई पर आ गये। सरकार हमें दोपहर 12 से 2 बजे के बीच भोजन प्रदान करती है। हमें अपने मवेशियों को खिलाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
एक अन्य स्थानीय बाढ़ पीड़ित का कहना है- हमारे लिये जीवित रहना बहुत मुश्किल है। हम पिछले 9-10 दिनों से यहां रह रहे हैं क्योंकि बाढ़ ने हमारे घरों में पानी भर दिया है। हमें दिन में बहुत देर से भोजन मिलता है और मवेशियों के लिये शायद ही कोई चारा मिलता है। जब से हमारे घरों में बाढ़ आई है, हमें सरकार से कोई मदद नहीं मिली है। पहले बाढ़ के पानी का स्तर बहुत अधिक था। अब यह थोड़ा नीचे चला गया है। लेकिन स्थिति बहुत खराब है। हम अपने दैनिक कार्यों को करने के लिये संघर्ष कर रहे हैं। हमारा दैनिक जीवन बहुत बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
सारण के एक स्थानीय निवासी सतीश कुमार सिंह ने कहा- शुरुआत में बहुत पानी था। स्कूल, अस्पताल, मंदिर बाढ़ के पानी में डूबे हुये थे। अब जल स्तर नीचे चला गया है। लेकिन स्थिति खराब है। हमने जो भी फसल बोई थी। बाढ़ के पानी से नष्ट हो गये हैं। हमें अभी तक सरकार से कोई मदद नहीं मिली है। हमें बताया गया था कि सरकार बाढ़ पीड़ितों को सहायता भेजेगी लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। सारण के एक अन्य स्थानीय निवासी कुंदन पटेल ने कहा- इस बाढ़ ने किसानों को तबाह कर दिया है। कर्ज लेने के बाद उन्होंने जो भी फसल बोई थी, वह नष्ट हो गई है। फसल खराब होने से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।

सारण में बाढ़ पीड़ित रविंदर महतो ने कहा- बाढ़ के कारण हमें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मेरी सभी फसलें बर्बाद हो गई हैं। जीवन रक्षा बहुत मुश्किल हो गई है। हमें परिवार और मवेशियों को खिलाने में समस्या हो रही है। 18 अगस्त को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हवाई सर्वेक्षण में खगड़िया और भागलपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया था। बिहार में लगभग 26 जिले लगातार बारिश के कारण बाढ़ से प्रभावित हुये हैं।

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