28 जुलाई को ओबीसी आरक्षण के लिये प्रदर्शन करते हुये आईसा कार्यकर्ता। Image Source : tweeted by @AISA_tweets

ऐतिहासिक फैसला- NIIT में ओबीसी को 27%, ईडब्ल्यूएस को 10% आरक्षण, देशभर से तेजस्वी को बधाई

New Delhi : एक ऐतिहासिक निर्णय में केंद्र सरकार ने स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा / दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों (एमबीबीएस / एमडी / एमएस / डिप्लोमा / बीडीएस / एमडीएस) के लिये अखिल भारतीय कोटा में ओबीसी के लिये 27% आरक्षण और ईडब्ल्यूएस (उच्च जाति के आर्थिक रूप से कमजोर) उम्मीदवारों के लिये 10% आरक्षण की घोषणा की है। यह वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2021-22 से प्रभावी हो जायेगा। इससे करीब 5,550 छात्र लाभान्वित होंगे। पीएम नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई को एक बैठक की और संबंधित मंत्रालयों को इस लंबे समय से लंबित मुद्दे के प्रभावी समाधान की सुविधा प्रदान करने का निर्देश दिया। चिकित्सा शिक्षा आरक्षण पर इस निर्णय से हर साल एमबीबीएस में लगभग 1500 ओबीसी छात्रों और स्नातकोत्तर में 2500 ओबीसी छात्रों और एमबीबीएस में लगभग 550 ईडब्ल्यूएस छात्रों और स्नातकोत्तर में लगभग 1000 ईडब्ल्यूएस छात्रों को लाभ होगा।

इसके लिये देशभर से राजद विधायक दल के नेता और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को लोग बधाई दे रहे हैं, क्योंकि वे लगातार यह मुद‍्दा उठा रहे थे। दिलीप मंडल ने उन्हें बधाई देते हुये ट‍्वीट किया- बधाई। NEET में ओबीसी कोटा लागू हो गया। आपके होने से ये भरोसा रहता है कि उत्तर भारत में सामाजिक न्याय की ज़मीन पूरी तरह बंजर नहीं हुई है। बाक़ी कई डरे-सहमे-दुबके नेताओं के मुताबिक़ एक स्टैलिन या एक तेजस्वी भारी है। शुक्रिया।
अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) योजना 1986 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत किसी भी राज्य के छात्रों को दूसरे राज्य में स्थित एक अच्छे मेडिकल कॉलेज में अध्ययन करने की इच्छा रखने के लिये अधिवास-मुक्त योग्यता आधारित अवसर प्रदान करने के लिये शुरू की गई थी। अखिल भारतीय कोटा में कुल उपलब्ध यूजी सीटों का 15% और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल उपलब्ध पीजी सीटों का 50% शामिल है। प्रारंभ में, 2007 तक AIQ योजना में कोई आरक्षण नहीं था। 2007 में, सुप्रीम कोर्ट ने AIQ योजना में SC के लिए 15% और ST के लिये 7.5% आरक्षण की शुरुआत की। जब 2007 में केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम प्रभावी हुआ, तो ओबीसी को एक समान 27% आरक्षण प्रदान किया गया। इसे सफदरजंग अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय सभी केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में लागू किया गया था।
हालाँकि इसे राज्य के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की AIQ सीटों तक नहीं बढ़ाया गया था। केंद्र सरकार ने अब एआईक्यू योजना में ओबीसी के लिये 27% आरक्षण और ईडब्ल्यूएस के लिये 10% आरक्षण प्रदान करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। देशभर के ओबीसी छात्र अब किसी भी राज्य में सीटों के लिये इस आरक्षण का लाभ उठा सकेंगे। उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के छात्रों को लाभ प्रदान करने के लिए, 2019 में एक संवैधानिक संशोधन किया गया, जिसने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान किया। तदनुसार, इस अतिरिक्त 10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण को समायोजित करने के लिये 2019-20 और 2020-21 में मेडिकल / डेंटल कॉलेजों में सीटों में दो साल की वृद्धि की गई ताकि अनारक्षित श्रेणी के लिये उपलब्ध सीटों की कुल संख्या कम न हो। हालांकि, एआईक्यू सीटों पर यह लाभ अभी तक नहीं बढ़ाया गया था। इसलिये, ओबीसी के लिये 27% आरक्षण के साथ, वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2021-22 से सभी स्नातक / स्नातकोत्तर चिकित्सा / दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिये एआईक्यू सीटों में ईडब्ल्यूएस के लिये 10% आरक्षण भी बढ़ाया जा रहा है। यह निर्णय 2014 से चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण सुधारों के अनुरूप भी है।

पिछले छह वर्षों के दौरान, देश में एमबीबीएस सीटें 2014 में 54,348 सीटों से बढ़कर 2020 में 84,649 सीटों तक पहुंच गई हैं और पीजी सीटों की संख्या 2014 में 30,191 सीटों से बढ़कर 2020 में 54,275 सीटों पर पहुंच गई है। इसी अवधि के दौरान, 179 नये मेडिकल कॉलेज स्थापित किये गये और अब देश में 558 (सरकारी 289, प्राइवेट 269) मेडिकल कॉलेज हैं। यह कदम स्पष्ट रूप से उत्तर प्रदेश में बड़े ओबीसी वोट बैंक के लिए एक और महत्वपूर्ण संकेत है। ओबीसी वोटों के प्रभुत्व को बनाये रखने के लिये बेताब प्रधानमंत्री ने अपनी कैबिनेट में ओबीसी सदस्यों की संख्या को पिछले फेरबदल में बढ़ाकर 27 कर दिया था।

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