हर साल 200 क्विंटल शहद पैदा कर रही बिहार की ये बेटी, एक झटके में गरीबी दूर

पटना

इनका नाम अनीता है। बिहार के अति पिछड़े इलाके से ये नाता रखती हैं। चाहतीं तो ये भी बाकी लोगों की तरह भेड़ चराने निकल जातीं। गरीबी में जीवन बितातीं जैसे कि परिवार का जीवन गरीबी में गुजरा है। पिता इनके जनार्दन सिंह एक ग्रॉसरी की दुकान में काम करते थे। किसी तरीके से गरीबी में जीवन गुजर रहा था। ये बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के पटियासा गांव की रहने वाली हैं। अनीता परंपरागत तरीकों से खुद को बांधकर रखना ही नहीं चाहती थीं। कुछ अलग करने की सोच थी इनकी। करके दिखा भी दिया।

एनसीईआरटी की किताब में

Class 4- ( Anita and the Honeybees ) chapter 5 of looking around #NCERT.  HINDI video explanation. - YouTube

फिलहाल ये 21 साल की हैं। इनकी बैचलर की डिग्री पूरी होने वाली है। इन्होंने शहद का कारोबार कर लिया। अनीता कि यह कामयाबी दुनिया भर में मशहूर हो गई। यूनिसेफ ने भी 2006 में अनीता से मुलाकात की। यूनिसेफ ने इस बारे में एक रिपोर्ट भी दी। यहां तक कि बीबीसी ने भी उन पर फिल्म बनाई। एनसीईआरटी की कक्षा चार की किताब में भी अनीता के नाम पर एक चैप्टर मौजूद है, जिससे बाकी बच्चे भी प्रेरणा ले रहे हैं।

सर्वश्रेष्ठ मधुमक्खी पालक का पुरस्कार

रिपोर्ताज: मई 2013

समस्तीपुर के पूजा के राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय से भी अनीता ने मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षण ले लिया। नई तकनीकों का वे इस्तेमाल करती हैं। बहुत से महिलाओं को भी वे ट्रेनिंग दे चुकी हैं। यही कारण है कि विश्वविद्यालय ने भी उन्हें सर्वश्रेष्ठ मधुमक्खी पालक का पुरस्कार देकर सम्मानित किया है। सबसे पहले तो अनीता के लिए पढ़ाई करना आसान नहीं था। माता-पिता तैयार नहीं थे। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी कि बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाया जा सके। किसी तरीके से अनीता ने अपने मां-बाप को मना लिया। वे राजी भी हो गए। एक वजह यह भी थी कि कक्षा 5 तक शिक्षा निःशुल्क थी।

पढ़ाने लगीं ट्यूशन

Honey girl of bihar

इसके बाद की पढ़ाई करना मुश्किल था, क्योंकि पिता इतना खर्च उठा नहीं सकते थे। ऐसे में अनीता ने बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया, ताकि अपनी पढ़ाई का खर्च निकाल सकें। इन्होंने मधुमक्खी पालने वालों से सीखना शुरू कर दिया कि मधुमक्खियों को कैसे पालते हैं। ये लोग पड़ोसी गांव से हमेशा आते रहते थे। इसलिए कि अनीता के गांव में लीची के पेड़ थे।

यूं सीखा पालना

बिहार में मधुमक्खी पालन विकास के विशाल दायरे : राधा मोहन सिंह - BolBihari -  Uniting Bihari around the globe

अनीता बताती हैं कि इस तरीके से उन्होंने मधुमक्खियों को पालना सीख लिया। यह बात जरूर है कि बचपन गरीबी में भी था, लेकिन उनके अरमान बहुत बड़े थे। बस धीरे-धीरे उन्होंने मधुमक्खी पालन में पूरा समय देना शुरू कर दिया। ट्यूशन करके जो 5000 रुपये बचाए थे, उसे इसमें लगा दिया। थोड़े-बहुत पैसे मां रेखा देवी से मिल गए। इस तरह से 2002 में उन्होंने अपना बिजनेस शुरू कर दिया। उस वक्त उन्होंने दो डब्बे में मधुमक्खियों को पालना शुरू किया था। कुछ ही महीने में अनीता को बढ़िया मुनाफा होने लगा।

इतना भी नहीं था आसान

मधुमक्खी पालन करने का आधुनिक तरीका और फायदें

मधुमक्खियों को पालना अनीता के लिए भी इतना भी आसान नहीं था। बार-बार मधुमक्खियां काट लेती थीं। चेहरा सूज जाता था। लोग मजाक भी उड़ाते थे। पूछते भी थे कि क्या फिर मधुमक्खी ने काट लिया। अनीता हां में जवाब देती थीं। वे पूछते थे कि दर्द नहीं हो रहा। अनीता कहती थीं कि बिल्कुल हो रहा है। इस तरह से अनीता आगे बढ़ती गईं। उनके पिता ने भी अपनी नौकरी छोड़ दी। वे भी अनीता के साथ इनके शहद वाले कारोबार में लग गए। दूसरे जिलों में वे मधुमक्खी का डब्बा लेकर जाते थे। अलग-अलग जगहों से वे शहद जमा करते थे।

शुरुआती मुनाफा

Bihar's Queen bee and her swarm - Indian Express

पहले तो जब अनीता ने कारोबार किया था तो 10 हजार रुपये का उन्हें मुनाफा हुआ था। वहीं आज की तारीख में 200 से 300 क्विंटल तक हर साल अनीता शहद का उत्पादन कर ले रही हैं। यही नहीं, सालाना उन्हें अब 3 से 4 लाख का मुनाफा आसानी से मिल जा रहा है। तभी तो अनीता अब हनी गर्ल के नाम से जानी जाने लगी हैं।

बदल गई किस्मत

The Girl Effect: Anita's story, India - Girls Not Brides

अनीता और उनके परिवार की किस्मत बदलते देर नहीं लगी। कच्चे मकान की जगह पक्का मकान बन गया है। अनीता ने अपने छोटे भाई को एक मोटरसाइकिल गिफ्ट में दे दिया है। इनकी सोशल लाइफ भी अब बहुत अच्छी हो गई है। इनकी मां एक राजनीतिक दल के टिकट पर गांव की मुखिया भी बन गई हैं। अनीता को जो सफलता मिली है, उससे गांव के बहुत से परिवार प्रेरणा ले रहे हैं। अनीता के गांव की आज हर लड़की स्कूल जा पा रही है।

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