एससीएसटी थाने के सामने मीडिया के सवालों से बचते आईएएस सुधीर कुमार। vishal kumar/Live Bihar

IAS को 4 घंटे दारोगा ने बिठाया, 50 पेज की अंग्रेजी समझ न आई तो FIR नहीं ली, जदयू MLA भी डरे

Patna : प्रदेश में जनता दल यूनाइटेड के नेतृत्व में नीतीश कुमार की सरकार चल रही है और उन्हीं के पार्टी के विधायकों को प्रदेश की कानून व्यवस्था से डर लग रहा है। सोशल मीडिया पर कोई फेक अकाउंट से भी धमकी दे रहा है तो डर जा रहे हैं। परबत्ता से विधायक डॉ.संजीव कुमार तो फिलहाल इस डर की आशंका से ग्रस्त हैं। फेसबुक पर नितेश कुमार नाम के युवक ने विधायक को गोली मारने की बात लिख दी है। विधायक ने इस बारे में डीजीपी, खगड़िया के एसपी और थानेदार को सूचित किया है। डॉ.संजीव ने इस स्थिति के लिये अपने जिला खगड़िया के एसपी को जिम्मेदार बताया है। उनके अनुसार, मैंने सबको अपनी जान पर खतरा की बात बता तो दिया है, लेकिन मेरे कहने, गुहार करने से क्या हो जायेगा? मैंने 20 दिन पहले भी अपने जिले के एसपी के काले कारनामों के बारे में सबको बताया था, उनको अक्षम बताते हुये जनहित में उनको तत्काल हटाने की मांग की थी, कहां कुछ हुआ?

जब सत्तारूढ़ दल के विधायक का ये हाल है, तो आम आदमी की स्थिति की कल्पना की जा सकती है। विधायक ने कहा कि हमारे प्रखंड उपाध्यक्ष गौतम पोद्दार ने फेसबुक पर पोस्ट किया था। इस पोस्ट पर नितेश नाम के शख्स ने कमेंट कर लिखा कि परबत्ता के विधायक डॉ. संजीव कुमार को कल गोली मार दी जायेगी। इधर, महुआ से राजद विधायक डॉ. मुकेश रौशन को एक शख्स ने फोन कर जान से मारने की धमकी दी है। फोन यूपी के नंबर से आया था। विधायक ने एसपी वैशाली से मिल कर शिकायत दर्ज कराई है। एफआईआर भी दर्ज हुई है। गौरतलब है कि विधायक के पिता रामदेवन राय की हत्या भी हाजीपुर स्टेशन चौक पर कर दी गई थी।
वैसे डॉ. मुकेश रौशन खुशकिस्मत थे कि उनकी एफआईआर दर्ज कर ली गई। नहीं तो यहां मुख्य सचिव स्तर के अफसर सुधीर कुमार के थाने में चार घंटे बैठने के बाद भी एफआईआर नहीं ली गई। बिहार कर्मचारी चयन आयोग के इंटर स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक मामले में जाली दस्तावेज से फंसाने के आरोप में आयोग के पूर्व अध्यक्ष स़ुधीर कुमार शनिवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिये एससी-एसटी थाना पहुंच गये। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पटना के पूर्व एसएसपी मनु महाराज, पूर्व एएसपी राकेश दुबे समेत कई अफसरों के खिलाफ जालसाजी, झूठा कागज बनाने और फर्जी साक्ष्य पेश करने की लिखित शिकायत दी। चार घंटे बाद उनका आवेदन तो ले लिया गया पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।

1987 बैच के आईएएस राजस्व पर्षद में अपर सदस्य हैं। वे अगले साल फरवरी में रिटायर होने वाले हैं। एससी-एसटी थानेदार डॉ. रामानुज राम के कक्ष से निकलने के बाद गृह विभाग के पूर्व प्रधान सचिव सुधीर कुमार ने बताया – दारोगा ने कहा अंग्रेजी में आवेदन है। दारोगा आवेदन कई बार पढ़ने के बाद भी समझ नहीं सका। क्यों एफआईआर नहीं किया गया यह तो दारोगा ही बतायेंगे। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में आईएएस सुधीर कुमार को 2 घंटे एक ही कक्ष में बैठ कर इंतजार करते रहना पड़ा। जैसे ही आईएएस सुधीर कुमार एससी-एसटी थाने पहुंचे, वैसे ही वहां के थानेदार डॉ. रामानुज राम वहां से चल दिये। करीब दो घंटे के बाद थानेदार आये। सुधीर कुमार ने 5 मार्च को भी शास्त्रीनगर थाना में शिकायत दी थी। एफआईआर दर्ज नहीं हुई। कुमार ने एसएसपी और आरटीआई से जवाब मांगा था पर कोई जवाब नहीं मिला।

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