न्यूयॉर्क टाइम्स में दैनिक भास्कर के नेशनल एडिटर का ओपेड छपा था, उसकी ब्रांडिंग दैनिक भास्कर में की गई थी। आज इनकम टैक्स छापे के बाद भोपाल में दैनिक भास्कर मुख्यालय की तस्वीर। Image Source : Dainik Bhaskar/ ANI

दैनिक भास्कर समूह के कई ऑफिस, सीएमडी-एमडी के घरों पर इनकम टैक्स के छापे

New Delhi : दैनिक भास्कर ग्रुप को भी आखिर सरकारी डंडे के डर का एहसास करा ही दिया गया। भास्कर समूह के देशभर के कई ऑफिस में इनकम टैक्स का रेड पड़ा। भोपाल मुख्यालय को सील कर खंगाला जा रहा है। इसी ऑफिस में ग्रुप के सीएम सुधीर अग्रवाल बैठते हैं। सूत्रों ने कहा कि समूह पर कर चोरी का आरोप लगाया गया है। इनकम टैक्स अफसरों ने दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में दैनिक भास्कर के परिसरों की तलाशी ली। दैनिक भास्कर ग्रुप का न्यूज बिजनेस के अलावा पॉवर सेक्टर समेत कुछ दूसरे क्षेत्रों में भी दखल है। ऐसी खबरें है कि उन कारोबार को लेकर भी फाइलें खंगाली जा रही हैं। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से कहा कि समूह के प्रमोटरों के घरों और कार्यालयों पर भी छापेमारी की गई है। सोशल मीडिया पर लोग इस कार्रवाई के लिये मोदी सरकार को कोस रहे हैं।

 

समूह के सीएमडी सुधीर अग्रवाल जहां भोपाल में रहते हैं वहीं डायरेक्टर पवन अग्रवाल दिल्ली और गिरीश अग्रवाल मुम्बई में बिजनेस संभालते हैं। ऐसी सूचना है कि तीनों भाइयों के ठिकानों पर छापा मारा गया है। डॉ. भरत अग्रवाल जो सुधीर अग्रवाल के करीबी हैं उनके ठिकाने भी खंगाले जा रहे हैं। समूह के जयपुर, अहमदाबाद, भोपाल और इंदौर कार्यालयों में तो छापेमारी चल ही रही है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा कोविड के “कुप्रबंधन” पर सही और तथ्यात्मक रिपोर्ट करने के कारण दैनिक भास्कर समूह पर छापा मारा गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट किया- अपनी रिपोर्टिंग के माध्यम से दैनिक भास्कर ने मोदी सरकार के कोविड-19 महामारी के बड़े पैमाने पर कुप्रबंधन को उजागर किया है। अब इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। अघोषित आपातकाल जैसा कि अरुण शौरी ने कहा है – यह एक संशोधित आपातकाल है।
देश के सबसे बड़े अखबार समूहों में से एक दैनिक भास्कर अप्रैल-मई में कोविड की दूसरी लहर में तबाही के पैमाने पर रिपोर्टिंग करने में सबसे आगे था। दैनिक भास्कर ने उन रिपोर्टों की एक श्रृंखला ही कर डाली जिसमें महामारी के दौरान आधिकारिक दावों पर आलोचनात्मक नज़र डाली गई क्योंकि उग्र संक्रमण ने लोगों को ऑक्सीजन, अस्पताल के बिस्तर और टीके के लिये बेबस कर दिया। गंगा में तैरते शवों का सच और गंगा के किनारों पर दबाई गई शवों का सच भी दैनिक भास्कर ने ही सबसे पहले उद‍्घाटित किया, जिसकी वजह से न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य विदेशी अखबारों ने दैनिक भास्कर के हवाले से कोरोना की दूसरी लहर की रिपोर्टिंग की।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक महीने पहले दैनिक भास्कर के नेशनल एडिटर ओम गौड़ के भारत में कोविड की मौतों पर ऑप-एड प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था: “द गंगा इज रिटर्निंग द डेड। इट्स नॉट लाइ।” सरकार के कोरोनो वायरस की लहर से निपटने पर ओम गौड़ ने लिखा- भारत की सबसे पवित्र नदियां मोदी प्रशासन की विफलताओं और धोखे की प्रदर्शनी बन गईं हैं।

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