159 साल पूर्व दर्ज हुई थी पहली FIR, मयुद्दीन की डेगची और उसकी औरत के कपड़े हुए थे चोरी

पटना

आजकल का जुग जमान ऐसा हो गया है कि बात-बात पर FIR यानी फर्स्ट हैंड रिपोर्ट दर्ज होती रहती है। आदमी सब को पुलिस थाना कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाना पड़ता है। पर ऐसा नहीं है कि FIR का जमाना हाल फिलहाल का है। अरे भैया ये कहानी तो 159 साल पुरानी है। लेकिन हम भी आज से पहले कहां इस बात को जानते थे। वो तो भला हो आईपीएस अधिकारी संतोष सिंह जी का, जिन्होंने अपने फेसबुक पेज पर इस रोचक जानकारी को साझा किया है। भारत में पहली बार एफआईआर आज से ठीक 159 साल पहले दर्ज हुई थी। यानी ये FIR 18 अक्टूबर 1861 को दर्ज हुई थी। आपको बता दें कि अंग्रेजों ने 1860 में आपराधिक दंड संहित बनाया था। उसके अगले साल ये FIR दर्ज हुई।

औरत के कपड़े तक हुए थे चोरी

इस एफआई का किस्सा बड़ा रोचक है। जिस शख्स ने एफआईआर दर्ज कराई थी उसके घर चोरी हो गई थी। चोरों ने घर से सामान के साथ उसकी औरत के कपड़े भी चुरा लिए थे। IPS संतोष सिंह छत्तीसगढ़ कैडर के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैं। इनकी गिनती छत्तीसगढ़ के तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों में से होती है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट लिखी है, जिसमें इस कहानी को बताया गया है। अब यहां से नीचे आप उनका लिखा हुआ पढ़ेंगे, हमारी तरफ से साभार:

1860 में अंग्रेजों ने बनाई थी आपराधिक दंड संहिता

IPS संतोष सिंह लिखते हैं, ‘ठीक 159 वर्ष पूर्व भारत में पहली एफआईआर (प्राथमिकी) दिल्ली के सब्जीमंडी पुलिस थाने में 18 अक्टूबर, 1861 को दर्ज की गई थी। अंग्रेजों ने 1860 में आपराधिक दंड संहिता बनाया, जिसे नाम दिया गया ताज-ए-रात-ए हिंद यानी इंडियन पीनल कोड (आईपीसी)। इसके साथ ही दिल्ली में पांच थाने बनाए गए – कोतवाली, सदर बाजार, सब्जी मंडी, महरौली और मुंडका (नांगलोई)।’

उर्दू में लिखी गई थी पहली FIR

वह आगे लिखते हैं, ’18 अक्टूबर, 1861 को एफआईआर कटरा शीशमहल निवासी मयुद्दीन, वल्द मुहम्मद यार खान ने दर्ज कराई। यह उस समय के प्रचलित भाषा उर्दू में लिखा गया था।एफआईआर के मुताबिक रात में (17 अक्टूबर को) मयुद्दीन के घर से तीन डेगचे, तीन डेगची, एक कटोरा, एक कुल्फी (कुल्फी बनाने का फ्रेम), एक हुक्का और औरतों के कपड़े कुल 45 आने (लगभग तब के 2.81 रुपये) कीमत के सामान चोरी हो गए।’

ठीक 159 वर्ष पूर्व भारत में पहली एफआईआर (प्राथमिकी) दिल्ली के सब्जीमंडी पुलिस थाने में 18 अक्टूबर, 1861 को दर्ज की गई…

Santosh Singh यांनी वर पोस्ट केले सोमवार, १९ ऑक्टोबर, २०२०

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *